कोलकाता, 19 नवंबर 2025
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों में दहशत पैदा कर दी है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने हाल के दिनों में उत्तर 24 परगना जिले की सीमा पर 300 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जो भारत छोड़कर अपने देश लौटने की कोशिश कर रहे थे। यह कार्रवाई SIR के ऐलान के बाद तेज हुई है, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाता सूची की सत्यापन कर रहे हैं।
SIR का क्या है असर?
SIR प्रक्रिया 2 नवंबर 2025 से राज्यव्यापी शुरू हुई है, जिसका मुख्य उद्देश्य फर्जी या अवैध वोटरों को मतदाता सूची से हटाना है। BLO द्वारा की जा रही घर-घर जांच ने अवैध प्रवासियों को घबरा दिया है, जो वर्षों से पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मजदूरी, नौकरानी या अन्य छोटे-मोटे काम करके रह रहे थे। BSF अधिकारियों के अनुसार, ये घुसपैठिए डिपोर्टेशन के डर से रातोंरात सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं।
हाल की घटनाओं में, BSF ने बसिरहाट, स्वरूपनगर, हकीमपुर और ताराली बॉर्डर क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों को पकड़ा। एक वरिष्ठ BSF अधिकारी ने बताया, “ये लोग SIR की जांच से बचने के लिए बेताब हैं। हमारी निगरानी बढ़ाने से कई प्रयास विफल हो चुके हैं।” गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1,049 अवैध बांग्लादेशी स्वेच्छा से भारत छोड़ने की कोशिश कर चुके थे, लेकिन SIR के बाद यह संख्या तेजी से बढ़ी है।
हाल की प्रमुख कार्रवाइयां: आंकड़ों पर नजर
पिछले दो हफ्तों में BSF की कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि SIR का प्रभाव सीधा और सकारात्मक पड़ रहा है। नीचे दी गई तालिका प्रमुख घटनाओं का सारांश प्रस्तुत करती है:
| तारीख | स्थान (उत्तर 24 परगना) | पकड़े गए बांग्लादेशी | विवरण |
| 1-2 नवंबर | बसिरहाट/स्वरूपनगर | 48 (15 + 33) |
महिलाएं और मजदूर शामिल; गाइघाटा और स्वरूपनगर पुलिस को सौंपा गया। |
| 2-4 नवंबर | ताराली बॉर्डर | 94 (11 + 45 + 38) |
पुरुष, महिलाएं और बच्चे; रात में सीमा पार करने की कोशिश। |
| 3-5 नवंबर | बिथारी/हकीमपुर | 56 |
143 बटालियन ने पकड़ा; पांच बच्चे शामिल। |
| 10 नवंबर | साहेबगंज (कूचबिहार) | 3 |
जेसमिन रहमान (50), खालिदा अख्तर (30) और मुहम्मद हसन अली (35)। |
| 17-18 नवंबर | हकीमपुर चेकपोस्ट | 300+ (एकत्रित) |
500 से अधिक फंसे; रिवराइन स्ट्रेच पर निगरानी। |
कुल मिलाकर, नवंबर के पहले 18 दिनों में ही 300 से अधिक बांग्लादेशी हिरासत में लिए गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट्स में दिखाया गया है कि कैसे ये लोग रात के अंधेरे में नाव या पैदल सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे। एक X पोस्ट में BJP नेता ने इसे “ममता बनर्जी के वोट बैंक का पलायन” करार दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विवादास्पद बहस
यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा, “SIR से बांग्लादेशी घुसपैठिए भाग रहे हैं। यह TMC की घुसपैठ नीति का सबूत है।” विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वे घुसपैठियों की रक्षा कर रही हैं, जबकि 540 किमी सीमा पर बाड़बंदी नहीं हो पाई।
दूसरी ओर, TMC ने SIR को “भाजपा का डरावना खेल” बताया, जो अल्पसंख्यकों में भय पैदा कर रहा है। ममता बनर्जी ने पहले BSF पर घुसपैठ की अनुमति देने का आरोप लगाया था, लेकिन अब यह रिवर्स ट्रेंड उलटा पड़ रहा है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR सभी मतदाताओं के लिए पारदर्शी है और कोई भेदभाव नहीं।
BSF की बढ़ी सतर्कता: भविष्य की चुनौतियां
BSF ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर गश्त बढ़ा दी है, खासकर नदी वाले इलाकों में। 143 बटालियन ने हकीमपुर में सबसे बड़ा समूह पकड़ा, जहां 500 से अधिक लोग जीरो लाइन के पास फंसे पाए गए। ये लोग कोलकाता के उपनगरों में रहते थे और अब डर के मारे वापस लौटना चाहते हैं। BSF ने इन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि SIR न केवल चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करेगी, बल्कि अवैध घुसपैठ पर अंकुश लगाएगी। हालांकि, सीमा पर तनाव बढ़ने से स्थानीय स्तर पर असर पड़ सकता है। गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि घुसपैठ रोकने के लिए समन्वय बढ़ाएं।