रांची, 11 जून 2026
रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज-2) निर्माण परियोजना को लेकर गुरुवार को विरोध प्रदर्शन की तीव्रता बढ़ गई। आदिवासी संगठनों और नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों, किसानों और आदिवासी समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी जमीन बचाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च निकाला, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कांके ब्लॉक चौक के पास रोक दिया।
गुरुवार को नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि वे RIMS-2 जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को इसके लिए उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय बंजर या गैर-कृषि भूमि का चयन करना चाहिए। उनका आरोप है कि नगड़ी की यह जमीन सदियों से खेती-किसानी का आधार रही है और इससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि RIMS-2 निर्माण के लिए उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण रद्द किया जाए। वे बंजर या सरकारी उपलब्ध भूमि पर परियोजना का निर्माण हो इस पक्ष में है।
नगड़ी में RIMS-2 के लिए भूमि चयन के बाद से ही विरोध शुरू हो गया था। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सुकुरहुटू में जमीन चिह्नित की गई थी, जहां विवाद होने पर नगड़ी को चुना गया। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि वे विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी आजीविका और उपजाऊ जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में भी गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सहित कई विपक्षी नेताओं ने पहले ही किसानों के समर्थन में आंदोलन की घोषणा की है। झारखंड राजधानी में आधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के रूप में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना अब स्थानीय किसानों और आदिवासियों के लिए विवाद का विषय बन गई है।
