रांची, 12 जून 2026
सरण्डा वन क्षेत्र में 2005 के पूर्व से बसे लोगों को वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत वनाधिकार पट्टा निर्गत करने एवं संविधान प्रदत मौलिक सुविधा महैया करवाने के संबंध में सारंडा वन क्षेत्र के लोग शुक्रवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मिले। भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बरला के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल रांची स्थित लोकभवन पहुंचा। पांच सदस्यीय इस दल में वन अधिकार समिति के बेनेडिक्ट लुगुन और माचवा चम्पिया भी शामिल रहे। इन लोगों ने राज्यपाल से गुहार लगायी कि सारंडा वन क्षेत्र के वनग्रामों के परिवारों की पहचान सुनिश्चित हो और यथा शीघ्र वनाधिकार पट्टा निर्गत करवाने की दिशा में संबंधित अधिकारीयों को निर्देश दिया जाय। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने जिला खनिज ट्रस्ट चाईबासा प० सिंहभूम में व्याप्त अनियमितताओं का उच्च स्तरीय जाँच उच्च न्यायालय झारखण्ड की निगरानी में करने को लेकर भी ज्ञापन सौंपे गये।
ज्ञापन में कहा गया है कि चिरिया, गुवा, किरीबुरू और नोवामुण्डी लौह अयस्क खान से प्रभावित क्षेत्र के लोंगो को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। खान प्रभावित क्षेत्र के लोंगो को पीने योग्य शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने को लेकर करोड़ों खर्च रूपए किए जा रहे है। वावजुद अभी भी ग्रामीण नदी-नालों का पानी पीने को विवश है। जबकि जिला खनिज फॉउडेसन ट्रस्ट में अगस्त-2025 तक 3344 करोड़ रूपये जमा थे। मनोहरपुर प्रखंड के लाईकोर पंचायत के 1196 परिवारों को पाईप लाईन के माध्यम से शुद्ध पीने योग्य पानी वितरण करने का दावा किया है। लेकिन जमीनी हकित इसके विपरीत है। यही स्थिति प्रखण्ड-मनोहरपुर पंचायत-डिम्बुली ग्राम-हाकागुई में स्थापित जलमीनार से 8 गाँव जिसमें हाकागुई, तेन्दा, तुमसाई, डिम्बुली, आरोवाकोचा, कामरबेड़ा, डुकुरडीह और दौतुम्बा शामिल है। उपरोक्त किसी भी गाँव में पाईप लाईन से पानी का सप्लाई नहीं दी जा रही है। प्रखण्ड के पंचायत रायडीह के राजस्व-ग्राम-जोजोगुटू में स्थापित जलमीनार सेजोजोगुटू महुलडिया, रायडीह, सोनपोखरी और रोंगो गाँव को पाईप लाईन के माध्यम पीने योग्य शुद्ध पेयजल पहुँचाना है। लेकिन अभी तक किसी भी गाँव में घर-घर पाईप लाईन नहीं पहुँचाय है। जबकि प्रक्कलन के अनुसार 95 प्रतिशत राशि की निकासी कर ली गई है। यही स्थिति रायकेरा एवं मकराण्डा में स्थापित जलमीनार की है।
मुलाकात के बाद भारत आदिवासी पार्टी पश्चिम सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने बताया कि वर्ष 2020 में वनग्राम दुमांगदिरी-तेन्ताई के 72 परिवारों ने वनाधिकार पट्टा हेतु वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत अनुमण्डल स्तरीय वनाधिकार समिति, पोडहाट-चक्रधरपुर में विधिवत दावा प्रस्तुत किए हैं। इसके बावजूद दावेदारों को अभी तक वनाधिकार पट्टा निर्गत नहीं किया गया है। इसी तरह 30 वनग्राम के सैकड़ों परिवारों ने अपने अपने दावे प्रस्तूत किये हैं, लेकिन इस मामले में जिला प्रशासन अबतक मौन है वो ना तो ग्रामीणों को वन पट्टा दे रहे और ना ही इन दावों को निरस्त करने की सूचना दे रहे। वे इस संबंध में दर्जनों बार जिला स्तर पर धरना दे चुके हैं और राज्यपाल से भी यह उनकी दूसरी मुलाकात है।
उन्होंने कहा कि सारण्डा वन क्षेत्र के 31468 हेक्टेयर को उच्चतम न्यायालय ने वन्यजीव अभ्यारण घोषित करने का निर्देश दिया है। लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह बातें नहीं रखी कि उस वन क्षेत्र में वन ग्राम भी हैं, जो 1905 से पहले बसे हैं। सुशील बारला ने बताया कि राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि वे मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखकर निर्देशित करेंगे। स्थानीय प्रशासन और विधायक को भी उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप किये जाने की बात कही।
