जम्मू-कश्मीर की वीरांगनाएं: सर्दियों में पुरुषों के अभाव में महिलाएं संभाल रही गांवों की सुरक्षा

जम्मू-कश्मीर, 14 जनवरी 2026

 

जम्मू और कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में महिलाओं की बहादुरी की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। नब्बे के दशक की शुरुआत से डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में सैकड़ों महिला विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) ने बंदूक थामकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा लिया है। ये महिलाएं न केवल अपनी हिम्मत साबित कर रही हैं, बल्कि पुरुष सदस्यों की अनुपस्थिति में भी अपने गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मजबूती से निभा रही हैं और उग्रवाद का डटकर मुकाबला कर रही हैं।

भद्रवाह के पुलिस अधीक्षक विनोद शर्मा ने बताया, “खासकर पहाड़ी चिनाब इलाके में या सही मायने में डोडा जिले में, कड़ाके की सर्दियों के दौरान परिवार के पुरुष सदस्य रोजगार की तलाश में उत्तराखंड, दिल्ली और मुंबई जैसे अन्य राज्यों में चले जाते हैं। ऐसे में कई गांवों में बुजुर्गों को छोड़कर कोई पुरुष सदस्य नहीं बचता, जिससे ये इलाके देश-विरोधी तत्वों की गतिविधियों के लिए कमजोर हो जाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि इन गांवों को आतंकी गतिविधियों से सुरक्षित रखने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने महिलाओं को VDG के रूप में प्रशिक्षित करने की पहल की है। ये महिलाएं देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति उतनी ही चिंतित हैं, जितने उनके पुरुष साथी। “हम उन्हें आतंकवादियों से लड़ने की रणनीति और तकनीक सिखाते हैं। इन बहादुर महिलाओं ने खुद को साबित किया है और हमें अब तक शानदार परिणाम मिले हैं।”

ये महिला VDG सदस्य .303 राइफल्स से लैस होती हैं और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के बाद दुर्गम और अलग-थलग इलाकों में तैनात की जाती हैं। डोडा, किश्तवाड़ और रामबन के दूर-दराज के कई गांवों में दर्जनों हथियारबंद महिलाओं को गश्त करते देखा जा सकता है। ये न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभरी हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

1990 के दशक में जब क्षेत्र में आतंकवाद चरम पर था, तब से ही VDG (पहले विलेज डिफेंस कमेटी के नाम से जाना जाता था) की शुरुआत हुई थी। अब ये महिलाएं हिंदू और मुस्लिम समुदायों से आती हैं और गांवों की रक्षा में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।

यह कहानी जम्मू-कश्मीर की उन वीरांगनाओं की है, जिन्होंने न सिर्फ घर संभाला, बल्कि सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा की कमान भी संभाल ली। इनकी बहादुरी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का जीता-जागता प्रमाण है।

 

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