तेहरान/दुबई, 12 जनवरी 2026
ईरान में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं और धार्मिक शासन के खिलाफ खुली बगावत में बदल गए हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन Human Rights Activists News Agency (HRANA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई में अब तक कम से कम 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। साथ ही, 10,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।ये आंकड़े इंटरनेट ब्लैकआउट और संचार प्रतिबंध के बावजूद ईरान स्थित कार्यकर्ताओं और गवाहों के आधार पर जुटाए गए हैं। कई रिपोर्टों में अस्पतालों पर छापे, घायलों को हिरासत में लेने और लाइव फायरिंग के गंभीर आरोप लगे हैं।
प्रदर्शनों की शुरुआत और कारण
प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ग्रैंड बाजार में महंगाई, राष्ट्रीय मुद्रा रियाल की रिकॉर्ड गिरावट (1.4-1.5 मिलियन रियाल प्रति डॉलर) और आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ छोटे स्तर पर शुरू हुए थे। जल्द ही ये विरोध 100 से अधिक शहरों और सभी 31 प्रांतों में फैल गए।

शुरुआती नारे आर्थिक थे, लेकिन अब प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ “मार्ग बर डिक्टेटर” (तानाशाह मुर्दाबाद) और शासन विरोधी नारे लगा रहे हैं। कई जगहों पर पूर्व राजशाही के समर्थन में भी आवाजें उठी हैं।
सरकार की सख्त कार्रवाई और धमकियां
ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को “विदेशी ताकतों (अमेरिका-इजराइल) द्वारा प्रायोजित उपद्रव और आतंकवाद” करार दिया है। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “उपद्रवी” और “विदेशी एजेंट” बताया है।
- अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को “मोहारेब” (ईश्वर का दुश्मन) मानकर मौत की सजा दी जा सकती है।
- पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं 72 घंटों से अधिक समय से बंद हैं।
- सुरक्षा बलों (IRGC, बसिज और पुलिस) ने लाइव गोलीबारी, आंसू गैस और सामूहिक गिरफ्तारियां तेज कर दी हैं।
- ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिका और इजराइल को “वैध निशाने” करार देते हुए पलटवार की धमकी दी है, अगर अमेरिका हस्तक्षेप करता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया है और कहा है कि अगर शासन प्रदर्शनकारियों पर हमला करता है तो ईरान को “भुगतना पड़ेगा”। ट्रंप ने सैन्य विकल्पों पर विचार किया है, लेकिन अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र महासचिव और मानवाधिकार संगठनों (एमनेस्टी इंटरनेशनल, Human Rights Watch) ने हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इंटरनेट बहाल करने, अत्यधिक बल प्रयोग रोकने और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
ईरान में स्थिति तेजी से बदल रही है। ब्लैकआउट के बावजूद सोशल मीडिया और स्टारलिंक के जरिए वीडियो बाहर आ रहे हैं, जो दमन की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह आंदोलन ईरानी शासन के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, और कई विश्लेषक इसे शासन के लिए अस्तित्व का संकट बता रहे हैं।
