दुमका (संताल परगना), 01 मई 2026
संताली भाषा की ओल चिकी लिपि के जनक गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की 121वीं जयंती संताल परगना महाविद्यालय, दुमका तथा रानीश्वर प्रखंड के विभिन्न गांवों में बड़े हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाई गई।
संताल परगना महाविद्यालय के परीक्षा प्रशाल भवन में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम आयोजित कर पंडित मुर्मू को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कुछ छात्राओं को ओल चिकी लिपि की किताबों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में राजेन्द्र मुर्मू (छात्र नेता), परेश मुर्मू, सुभाष किस्कू, नायक दास सोरेन, रोहित मुर्मू, आदित्य हांस्दा, शिबु मुर्मू, संजय मुर्मू, सिलबास्टर सोरेन, अनुप हांस्दा, सेलीना हांस्दा, प्रमिला हांस्दा, ऐलिशा हांस्दा, कुमिला टुडू, मसोती हांस्दा, राजमुनी सोरेन, सुनीता मरांडी, अस्मिता सोरेन, प्रमिला हेम्बरम, अनु मेम्बरम, नीलम सोरेन, अलपना हांस्दा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।

इसी दिन रानीश्वर प्रखंड के कौरशिला, काठालिया, मोहनपुर, डुहुमुर्गा, रखालपहाड़ी, गुलामशुली सहित कई गांवों में भी जयंती मनाई गई। ग्रामीणों ने आदिवासी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की, गुरु गोमके के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। कई गांवों में मांगो रैली निकाली गई तथा नाच-गान का आयोजन किया गया।
पंडित रघुनाथ मुर्मू का जन्म 5 मई 1905 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के डांडबोस (दंडबोस) गांव में बुद्ध पूर्णिमा के दिन हुआ था। मात्र 20 वर्ष की आयु में वर्ष 1925 में उन्होंने ओल चिकी लिपि का आविष्कार कर संताली भाषा को लिखित रूप प्रदान किया। इस वर्ष ओल चिकी लिपि के 101 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

उन्हें संताल समाज के प्रमुख सांस्कृतिक पुनर्जागरणकर्ता, शिक्षाविद् और समाज सुधारक के रूप में याद किया जाता है। उनकी ओल चिकी लिपि ने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने की मजबूत नींव प्रदान की (संताली भाषा 2003 में शामिल की गई)।
इस पावन अवसर पर ग्रामीणों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि संताली भाषा को राज्य में प्रथम राजभाषा का दर्जा दिया जाए। साथ ही पश्चिम बंगाल की तर्ज पर KG से PG तक संताली (ओल चिकी) माध्यम से शिक्षा शुरू की जाए और संताल बहुल क्षेत्रों के सरकारी कार्यालयों के नामपट्ट ओल चिकी में भी लिखे जाएं।
कार्यक्रम में समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन, बाबूलाल मुर्मू, दिनेश सोरेन, ठाकुर सोरेन, मनियल मरांडी, जोबा सोरेन, वीणा हांसदा, मकलु किस्कु, प्रियंका सोरेन, सिकंदर मुर्मू, प्रधान हेम्ब्रम और बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे शामिल हुए।
