कोलकाता, 20 मई 2026
हाल में हुए विधानसभा चुनावों में करारी हार झेलने और सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नई भाजपा सरकार के खिलाफ बुधवार को विधानसभा परिसर में आयोजित TMC के पहले बड़े धरना-प्रदर्शन को ही पार्टी के अंदरूनी बिखराव का संकेत माना जा रहा है।
धरना में भारी अनुपस्थिति
डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित इस धरने में TMC के 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से केवल 34 ही मौजूद रहे। 46 विधायक गैरहाजिर रहे, जिससे पार्टी में असंतोष और संगठनात्मक कमजोरी की चर्चा तेज हो गई है।
प्रदर्शन के मुद्दे
TMC ने धरने के दौरान निम्नलिखित मुद्दों पर नई भाजपा सरकार पर हमला बोला:
- चुनाव परिणामों के बाद राज्यभर में कथित राजनीतिक हिंसा और TMC कार्यालयों पर हमले।
- नई सरकार द्वारा बुलडोजर कार्रवाई (खासकर अल्पसंख्यक इलाकों में)।
- रेलवे भूमि और स्टेशनों के आसपास फेरीवालों एवं दुकानदारों को कथित तौर पर जबरन हटाने की कार्रवाई।
TMC नेताओं ने इसे “बुलडोजर संस्कृति” और “जनविरोधी नीतियों” का हिस्सा बताया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
BJP ने TMC के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नई सरकार कानून व्यवस्था बहाल करने और अवैध अतिक्रमण हटाने का काम कर रही है। BJP नेताओं ने TMC पर पिछले 15 सालों में हुए भ्रष्टाचार और तानाशाही का हवाला दिया। TMC सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायकों की अनुपस्थिति व्यक्तिगत कारणों या स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी है, जबकि विपक्ष इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और भविष्य की रणनीति पर मतभेद का संकेत बता रहा है। खबर विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित।
