दिल्ली में 24 मई को जनजाति का महाकारवां: 1.5 लाख आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा में लालकिले की ओर, सनातन संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन

नई दिल्ली, 22 मई 2026
24 मई 2026 को राजधानी दिल्ली एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अनूठे अनुभव की गवाह बनेगी। देशभर की 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लगभग 1.5 लाख सदस्य विभिन्न मार्गों से पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों की थाप, गीतों और नृत्यों के साथ लालकिला मैदान की ओर बढ़ेंगे। यह भव्य यात्रा जनजाति सांस्कृतिक समागम 2026 का हिस्सा है, जो भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

शाम 6 बजे से लालकिला मैदान में सांस्कृतिक समागम — जिसमें जनजातीय नृत्य, संगीत, लोक कलाएं, हस्तशिल्प प्रदर्शनी आदि शामिल होंगे।
यात्रा की खासियतें:

  • जनजाति समाज के लोग कई किलोमीटर लंबे कारवां के रूप में दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से एक साथ निकलेंगे।
  • पारंपरिक पोशाक, ढोल-मादल, नगाड़ा, तुरही जैसी वाद्ययंत्रों के साथ गाते-झूमते हुए आगे बढ़ेंगे।
  • यह यात्रा दिल्लीवासियों के लिए अनूठा, अविस्मरणीय और अचंभित कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत करेगी।
  • आयोजकों के अनुसार, यह यात्रा मात्र एक रैली नहीं, बल्कि सनातन धरोहर को सहेजे हुए जनजाति समाज की संस्कृति, विविधता, प्रकृति प्रेम और भारतीयता से गहरे जुड़ाव की जीवंत प्रस्तुति होगी।

समागम का उद्देश्य:

लालकिला मैदान में पहुंचने के बाद वृहद जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन होगा। इसमें जनजातीय नृत्य, संगीत, लोक कलाएं, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होने वाले हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और जनजातीय गौरव को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। जनजाति सुरक्षा मंच का कहना है कि यह स्वतंत्र भारत में दिल्ली में जनजातीय समाज का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम होगा।

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