रांची, 09 जून 2026
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को राजधानी रांची के लालपुर स्थित समाधि स्थल और बिरसा चौक स्थित उनकी भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व पत्नी सह विधायक कल्पना सोरेन ने संयुक्त रूप से बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने कुछ देर श्रद्धापूर्वक खड़े होकर महान आदिवासी जननायक को नमन किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा आमजन भी मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए…राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत और देश की आजादी के महानायक हैं। उनकी विचारधारा आज भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलते हुए राज्य के समग्र विकास का संकल्प व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा हमारे संघर्ष और अस्मिता के प्रतीक हैं। उनकी कुर्बानी के कारण ही आज हमारी आवाज मजबूत हुई है। उनकी पुण्यतिथि पर हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि उनके सपनों का झारखंड बनाने के लिए निरंतर काम करेंगे।”
कौन थे भगवान बिरसा मुंडा?
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को खूंटी जिले के उलिहातू गांव में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश शासन और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ उलगुलान (महान विद्रोह) का नेतृत्व किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में 9 जून 1900 को रांची जेल में उनका निधन हो गया। आदिवासी समाज उन्हें भगवान के रूप में पूजता है और उनकी याद में 9 जून को हर वर्ष राज्य स्तर पर पुण्यतिथि मनाई जाती है।
