असम में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ संताल लिबरेशन आर्मी का प्रमुख: झारखंड के साहिबगंज और गोड्डा में कई मामलों का आरोपी

गुवाहाटी/रांची

 

असम के कोकराझाड़ जिले में शनिवार सुबह एक बड़ी पुलिस कार्रवाई में नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी (एनएसएलए) के प्रमुख रोहित मुर्मू उर्फ एपिल मुर्मू को गोली मार दी गई। 40 वर्षीय मुर्मू, जो झारखंड के साहिबगंज जिले का निवासी था, रेलवे ट्रैक पर आईईडी विस्फोटों समेत कई उग्रवादी गतिविधियों का मुख्य आरोपी माना जा रहा था। उसके खिलाफ साहिबगंज, गोड्डा और पाकुड़ जिलों के विभिन्न थानों में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हथियार अधिनियम, बम विस्फोट और अन्य अपराध शामिल हैं। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी, और इस मुठभेड़ से सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली है।

मुठभेड़ का विवरण

कोकराझाड़ के नादंगुरी क्षेत्र में शनिवार तड़के असम पुलिस की एक संयुक्त टीम ने छापेमारी की। मुखबिरों के आधार पर मिली जानकारी के अनुसार, मुर्मू और उसके साथी जंगल में छिपे हुए थे। जैसे ही पुलिस टीम ने घेराबंदी की, मुर्मू ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और घटनास्थल पर ही मारा गया। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक पिस्तौल, दो ग्रेनेड, मतदाता पहचान पत्र (एपिल मुर्मू के नाम से), एटीएम कार्ड (रोहित मुर्मू के नाम से) और अन्य आपराधिक दस्तावेज बरामद किए। कोकराझाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पुष्पराज सिंह ने बताया, “मुठभेड़ में करीब 10 संदिग्ध मौजूद थे, बाकी पहाड़ी क्षेत्र में भाग गए। हम उनकी तलाश में अभियान चला रहे हैं।”

झारखंड पुलिस की एक टीम भी हाल ही में असम पहुंची थी, जो मुर्मू को गिरफ्तार करने के लिए सहयोग कर रही थी। साहिबगंज के एसपी अमित कुमार ने कहा, “मुर्मू के खिलाफ 2014 से कई नॉन-बेलेबल वारंट लंबित थे। वह 2024 में साहिबगंज रेलवे ट्रैक विस्फोट का मास्टरमाइंड था, जिसकी जिम्मेदारी एनएसएलए ने ली थी।”

अपराधी इतिहास और माओवादी कनेक्शन

रोहित मुर्मू उर्फ एपिल मुर्मू 2013 से सक्रिय था। झारखंड में वह रोहित के नाम से जाना जाता था, जबकि असम में एपिल मुर्मू बनकर रहता था और कोकराझाड़ के कचुगांव के ग्राहमपुर गांव का निवासी होने का दावा करता था। वह एनएसएलए का पूर्व नेता था, जो एक प्रतिबंधित संगठन है और माओवादी गुटों से जुड़ा हुआ है। 2015 से वह असम के बोडोलैंड क्षेत्र (बीटीआर) में उग्रवादी गतिविधियां चला रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, मुर्मू ने असम में नया माओवादी नेटवर्क स्थापित करने की कोशिश की थी, जिसमें रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शामिल था।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा था, “यह व्यक्ति असम में नया संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रहा था। रेलवे विस्फोटों से बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा करने का इरादा था।” पुलिस को शक है कि 23 अक्टूबर को कोकराझाड़ रेलवे ट्रैक पर हुए आईईडी विस्फोट में भी मुर्मू का हाथ था, जो 2024 के झारखंड विस्फोट से मिलता-जुलता था। इस विस्फोट से निचले असम और उत्तरी बंगाल में रेल सेवाएं प्रभावित हुई थीं।

मुर्मू के मारे जाने से असम और झारखंड पुलिस ने राहत की सांस ली है, क्योंकि उसके गुट से और हमलों का खतरा था। एसएसपी सिंह ने कहा, “वह 2015 से सक्रिय था और झारखंड-असम के बीच सक्रिय रूप से घूमता था। उसके नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभियान जारी है।” मुर्मू का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने अन्य संदिग्धों की तलाश में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

 

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