दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़, 14 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हासिल हुई। कुल 63 माओवादी कैडरों ने पुलिस और सीआरपीएफ के सामने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की। इनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं। समर्पण करने वाले 36 नक्सलियों पर कुल 1.19 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की ‘पूना मार्गेम: पुनर्वास से पुनरुत्थान’ योजना के तहत हुआ। सरेंडर करने वाले कैडर दर्भा डिवीजन, साउथ बस्तर डिवीजन, वेस्ट बस्तर डिवीजन और माड़ डिवीजन से सक्रिय थे। इनमें डिविजनल कमेटी सदस्य, एरिया कमेटी सदस्य, मिलिशिया प्लाटून कमांडर और हिंसक गतिविधियों में शामिल अन्य सदस्य शामिल हैं।
ये नक्सली विभिन्न हमलों, आईईडी विस्फोटों, एंबुश और रेकी जैसी गतिविधियों में शामिल रहे थे। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, विकास कार्यों और पुनर्वास नीति के प्रभाव से वे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हुए।
सरकार की नीति के तहत सभी 63 आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें पुनर्वास पैकेज के तहत आगे की मदद, प्रशिक्षण और सामाजिक मुख्यधारा में शामिल होने के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
यह हाल के वर्षों में दंतेवाड़ा जिले का सबसे बड़ा सामूहिक सरेंडर माना जा रहा है। इससे बस्तर क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क को गहरा झटका लगा है और केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म को समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों से नक्सल प्रभावित इलाकों में आत्मसमर्पण की संख्या बढ़ रही है, जो विकास, संवाद और पुनर्वास के रास्ते से हिंसा छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। यह घटना माओवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
