भारत बना विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: जापान को पछाड़ा, 2030 तक जर्मनी को भी पीछे छोड़ने की राह पर

नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025

 

भारत ने वैश्विक आर्थिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। सरकार की ओर से जारी वर्षांत आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। भारत की नॉमिनल जीडीपी अब 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गई है। यह उपलब्धि मजबूत घरेलू मांग, संरचनात्मक सुधारों और निरंतर उच्च विकास दर का परिणाम है।

वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस प्रकार हैं:

पहला स्थान: अमेरिका

दूसरा स्थान: चीन

तीसरा स्थान: जर्मनी

चौथा स्थान: भारत (जापान को पीछे छोड़कर)

सरकार के अनुसार, मौजूदा रफ्तार बनी रही तो भारत अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को भी पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अनुमान है कि 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।

विकास की रफ्तार बरकरार, ‘गोल्डीलॉक्स’ दौर में भारतभारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ऊंची है। यह पहली तिमाही के 7.8 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के 7.4 प्रतिशत से अधिक है।

इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे मुख्य कारण:

मजबूत निजी उपभोग

औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की ठोस वृद्धि

मुद्रास्फीति का नियंत्रण में रहना

बेरोजगारी में गिरावट

निर्यात में सुधार

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान 7.3 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। वैश्विक संस्थानों की भविष्यवाणियां भी उत्साहजनक हैं:विश्व बैंक: 2026 में 6.5 प्रतिशत वृद्धि

मूडीज: 2026-27 में जी-20 में सबसे तेज विकास

आईएमएफ: 2025 में 6.6 प्रतिशत, 2026 में 6.2 प्रतिशत

ओईसीडी, एसएंडपी, एशियन डेवलपमेंट बैंक और फिच भी 6.5 से 7.4 प्रतिशत के बीच अनुमान लगा रहे हैं

चुनौतियों के बावजूद मजबूत आधार

वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली साबित हुई है। सरकार ने इसे “गोल्डीलॉक्स पीरियड” करार दिया है – जहां उच्च विकास के साथ कम मुद्रास्फीति है। वित्तीय स्थिति स्थिर है, व्यावसायिक क्षेत्र में क्रेडिट प्रवाह मजबूत है और शहरी उपभोग में तेजी आई है।

यह उपलब्धि पिछले एक दशक के सुधारों का नतीजा है, जिसमें डिजिटल इंडिया, जीएसटी, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे कदम शामिल हैं। भारत अब न केवल आकार में बड़ा हो रहा है, बल्कि गुणवत्ता और समावेशी विकास की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

आगे की राह

2030 तक तीसरे स्थान और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य अब और करीब लग रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा जनसंख्या, डिजिटल क्रांति और निवेश अनुकूल नीतियां भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

 

 

 

 

 

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