नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026
26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर होने वाले भव्य गणतंत्र दिवस समारोह में भारतीय सेना की सेरेमोनियल बैटरी द्वारा 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इस बार यह सलामी ब्रिटिश काल की पुरानी 25 पाउंडर तोपों की जगह स्वदेशी 105 mm लाइट फील्ड गन से फायर की जाएगी। ये गन 1982 में विकसित हुई हैं, जिनकी फायरिंग रेंज 17.2 किमी है और ये प्रति मिनट 6 राउंड फायर कर सकती हैं।
भारत में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर 21 तोपों की सलामी (21-gun salute) एक पारंपरिक और सबसे ऊँचा सैन्य सम्मान है। यह राष्ट्रपति (भारत के सर्वोच्च सेनाध्यक्ष), राष्ट्रीय ध्वज और पूरे राष्ट्र को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
क्यों दी जाती है 21 तोपों की सलामी
- सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक: 21 तोपों की सलामी दुनिया भर में राज्यों के प्रमुख (heads of state) और राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है। भारत में यह राष्ट्रपति, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और गणतंत्र की स्थापना के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए दी जाती है।
- परंपरा की शुरुआत: यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जहाँ नौसेना और सैन्य रीति में जहाज पर आने वाले मेहमानों को शांति का संकेत देने के लिए बंदूकें खाली करके फायर की जाती थीं। समय के साथ यह 21 की संख्या में स्थिर हो गई, जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक है।
- गणतंत्र दिवस से जुड़ाव: 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उसी दिन पहली बार 21 तोपों की सलामी दी गई, जो गणतंत्र के जन्म का ऐतिहासिक प्रतीक बनी। तब से हर साल राष्ट्रगान बजने के साथ यह सलामी दी जाती है, जो राष्ट्रगान की अवधि (लगभग 52 सेकंड) में पूरी होती है।
कब-कब दी जाती है:
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- गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर।
- विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की भारत यात्रा पर।
- राष्ट्रपति और अन्य उच्च पदाधिकारियों के सम्मान में।
- कुछ विशेष अवसरों पर (जैसे शहीदों के अंतिम संस्कार में भी यह सम्मान दिया जा सकता है)।
कैसे दी जाती है सलामी?
- वास्तव में 21 गोले दागे जाते हैं, लेकिन सिर्फ 7-8 तोपों (आमतौर पर 105 mm लाइट फील्ड गन या पहले 25-पाउंडर) का इस्तेमाल होता है।
- प्रत्येक तोप से 3-3 राउंड फायर किए जाते हैं (कुल 21), और यह पूरी प्रक्रिया सेरेमोनियल बैटरी (जैसे 1721 फील्ड बैटरी) द्वारा की जाती है।
- 2026 में पहली बार स्वदेशी 105 mm लाइट फील्ड गन से यह सलामी दी जा रही है, जो आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।
यह सलामी न केवल सैन्य अनुशासन, सटीकता और समन्वय का प्रदर्शन है, बल्कि भारत की संप्रभुता, शांति और गौरव का भी जीवंत प्रतीक है। सेरेमोनियल बैटरी के मेजर पवन सिंह शेखावत ने इसे यूनिट के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारी सेरेमोनियल बैटरी के लिए बेहद गर्व का पल है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ राष्ट्रगान की पहली धुन से शुरू होकर अंतिम धुन तक पूरी तरह सिंक्रोनाइज्ड 21 राउंड सिर्फ 52 सेकंड में फायर किए जाएंगे। यह अनुशासन, समन्वय और स्वदेशी शक्ति का जीवंत प्रदर्शन होगा।” यह 21 तोपों की सलामी न केवल राष्ट्र को सलाम करती है, बल्कि भारतीय सेना के जज्बे, तकनीकी कौशल और स्वावलंबन को दुनिया के सामने रखती है। पूरा देश 26 जनवरी को इस भव्य प्रदर्शन का इंतजार कर रहा है।
