तेहरान, 01 मार्च 2026
आयतुल्लाह सय्यद अली होसैनी खामेनेई (19 अप्रैल 1939 – 28 फरवरी 2026) ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) थे, जिन्होंने 1989 से 2026 तक लगभग 37 वर्षों तक इस्लामिक गणराज्य ईरान का नेतृत्व किया। वे इस्लामिक क्रांति के प्रमुख चेहरे रहे और आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के बाद ईरान की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक-क्रांतिकारी विचारधारा के प्रमुख वास्तुकार बने। उनकी मृत्यु 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में तेहरान स्थित उनके आवास पर हुई, जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च 2026 को की।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के पवित्र शहर मशहद (खोरासान प्रांत) में हुआ। वे सय्यद जावाद खामेनेई (एक गरीब इस्लामी विद्वान) के दूसरे पुत्र थे। परिवार अत्यंत साधारण और गरीब था। पिता एक साधु स्वभाव के मुज्तहिद थे, जिनकी वजह से घर में सादगी का माहौल था। कभी-कभी रात का खाना सिर्फ रोटी और किशमिश होता था। घर महज 65 वर्ग मीटर का एक कमरा और तहखाना था। खामेनेई ने बचपन में इसी सादगी और धार्मिक वातावरण में शिक्षा ग्रहण की।
शिक्षा और धार्मिक प्रशिक्षण
चार वर्ष की आयु में उन्होंने कुरान और अरबी सीखना शुरू किया। मशहद के हौजे (धार्मिक स्कूल) में तर्कशास्त्र, दर्शन और फिक्ह (इस्लामी कानून) की पढ़ाई की। 1957 में नजफ (इराक) गए, लेकिन पिता की इच्छा से वापस लौट आए। 1958 में कुम (ईरान का प्रमुख धार्मिक केंद्र) पहुंचे और वहां ग्रैंड आयतुल्लाह बोরुजerdi, आयतुल्लाह खुमैनी, हाएरी याज्दी और अल्लामा तबाताबाई जैसे विद्वानों से शिक्षा ली। उन्होंने कुरान व्याख्या, हदीस और इस्लामी विचारधारा पर कक्षाएं लीं और बाद में खुद शिक्षक बने। वे अरबी, फारसी और अजरबैजानी में पारंगत थे तथा कविता भी लिखते थे।
क्रांतिकारी संघर्ष और शाह के खिलाफ आंदोलन
13 वर्ष की आयु (1952) में नव्वाब सफवी के भाषण से क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित हुए। 1962 से आयतुल्लाह खुमैनी के अनुयायी बन गए और शाह मोहम्मद रजा पहलवी की अमेरिका-समर्थक, इस्लाम-विरोधी नीतियों के खिलाफ सक्रिय हुए। SAVAK (शाह की गुप्त पुलिस) ने उन्हें छह बार गिरफ्तार किया, यातनाएं दीं और तीन वर्ष के लिए निर्वासित किया। 1963 के जून विद्रोह (15 खोरदाद) में शामिल रहे। 1970 के दशक में मशहद और तेहरान में गुप्त कुरान कक्षाएं चलाईं, जो युवाओं में क्रांति का बीज बोने वाली साबित हुईं। 1975-76 में लंबी जेल और निर्वासन के बाद 1978 में क्रांति के दौरान मशहद लौटे।
1979 की इस्लामिक क्रांति में भूमिका
खामेनेई क्रांति के मुख्य संगठकों में शामिल थे। क्रांति की सफलता के तुरंत बाद इस्लामिक रेवोल्यूशनरी काउंसिल के सदस्य बने, डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर रहे, इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सुपरवाइजर बने और तेहरान के फ्राइडे प्रेयर इमाम नियुक्त हुए। वे खुमैनी के निकटतम सहयोगियों में से एक थे।
राष्ट्रपति पद (1981-1989)
1981 में मोहम्मद अली रजाई की हत्या के बाद वे राष्ट्रपति बने (97% वोटों से) – ईरान के पहले धार्मिक राष्ट्रपति। 1985 में पुनः चुने गए। ईरान-इराक युद्ध के दौरान सेना की कमान संभाली। 1981 में मुजाहिदीन-ए-खल्क के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए, जिससे उनका दाहिना हाथ स्थायी रूप से प्रभावित रहा। राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने क्रांतिकारी संस्थाओं को मजबूत किया और वेलायत-ए-फकीह (धार्मिक विद्वान का शासन) की अवधारणा को आगे बढ़ाया।
सर्वोच्च नेता के रूप में उदय (1989)
खुमैनी की मृत्यु (3 जून 1989) के बाद एक्सपर्ट्स असेम्बली ने 4 जून 1989 को उन्हें कार्यवाहक सर्वोच्च नेता चुना। संविधान में संशोधन कर मार्जा-ए-तक़लीद (सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकार) की शर्त हटाई गई। 6 अगस्त 1989 को स्थायी रूप से सर्वोच्च नेता चुने गए। शुरू में उनकी नियुक्ति पर संदेह था क्योंकि वे उच्चतम धार्मिक पद पर नहीं थे, लेकिन उन्होंने IRGC और संस्थागत शक्ति के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की।
सर्वोच्च नेता के रूप में शासन (1989-2026)
खामेनेई ईरान के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता बने। उन्होंने:
- परमाणु कार्यक्रम: नागरिक उपयोग के लिए समर्थन, लेकिन परमाणु हथियारों पर फतवा जारी किया।
- विदेश नीति: “प्रतिरोध की धुरी” (हिजबुल्लाह, हमास, हूती आदि) को मजबूत किया, इजरायल और अमेरिका का कड़ा विरोध।
- आर्थिक नीति: निजीकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर।
- घरेलू नीति: सुधारवादी आंदोलनों (2009 ग्रीन मूवमेंट, 2022 महसा अमीनी विरोध) को कुचला, प्रेस पर सेंसरशिप, महिलाओं के अधिकारों पर सख्ती।
- प्रमुख घटनाएं: 2015 JCPOA (परमाणु समझौता) का समर्थन लेकिन 2018 में अमेरिका के हटने पर विरोध; 2025 इजरायल युद्ध; 2025-26 विरोध प्रदर्शन।
वे कट्टरपंथी लेकिन व्यावहारिक नेता माने जाते थे, जिन्होंने IRGC को देश की सबसे शक्तिशाली संस्था बनाया।
पारिवारिक जीवन
1964 में मनसुरेह खोजास्ते बागेरजादे से विवाह। छह संतानें: पुत्र मोस्तफा, मोज्तबा (संभावित उत्तराधिकारी चर्चा), मसऊद आदि। परिवार सादगी से रहता था।
विरासत
खामेनेई ने ईरान को क्षेत्रीय शक्ति बनाया, लेकिन आर्थिक संकट, विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय अलगाव भी उनके शासन की देन रहे। वे इस्लामिक क्रांति की निरंतरता के प्रतीक बने, लेकिन आलोचक उन्हें दमनकारी शासन का प्रतीक मानते हैं। उनकी मृत्यु के बाद उत्तराधिकार (संभवतः पुत्र मोज्तबा या अन्य) पर अनिश्चितता है।
