मनोहरपुर (पश्चिम सिंहभूम), 13 मार्च 2026
लगभग 18-20 साल पहले उद्योग स्थापना के नाम पर अपनी वंशानुगत कृषि योग्य भूमि देने वाले मनोहरपुर प्रखंड के डिंबुली गांव के रैयत अब अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्षरत हैं। कंपनी M/s वी.एस. डेम्पो एंड कंपनी प्रा. लि. द्वारा 2005 में झारखंड सरकार के साथ किए गए एमओयू के तहत 110.53 एकड़ जमीन खरीदी गई थी, लेकिन डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यहां कोई औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं हुई।
रैयतों ने बताया कि 6 अक्टूबर 2005 को कंपनी ने राज्य सरकार के साथ उन्नयन तथा अनुवर्ती मूल्य संवर्धन जनित परियोजना के लिए एमओयू साइन किया था। जमीन सीएनटी एक्ट की धारा 49 के तहत तत्कालीन डीसी के आदेश पर खरीदी गई, जिसमें स्पष्ट शर्त थी कि औद्योगिक इकाई 5 साल के अंदर स्थापित कर ली जाए। यदि ऐसा नहीं होता है या जमीन का गैर-औद्योगिक उपयोग होता है, तो अनुमति स्वतः निरस्त हो जाएगी और कंपनी को जमीन मूल रैयतों को वापस करनी होगी। अन्यथा राज्य सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी।
न उद्योग, न जमीन वापसी
आज तक कंपनी ने जमीन पर कोई निवेश नहीं किया, न घेराबंदी की, न कोई निर्माण कार्य शुरू किया। जमीन अभी भी रैयतों के कब्जे में है और वे खेती कर रहे हैं। साथ ही, वे मालगुजारी (भूमि कर) भी दे रहे हैं। पिछले 6 साल से रैयत प्रशासन को पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब वे आंदोलन करने के मूड में हैं।
भारत आदिवासी पार्टी का समर्थन
स्थानीय नेता और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के पश्चिम सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुशील बरला ने रैयतों का साथ दिया है। शुक्रवार को गांव पहुंचकर ग्रामीणों ने प्रशासन की सुस्ती पर नाराजगी जताई। सुशील बरला ने इस मामले को राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ, झारखंड के मुख्य सचिव, जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा है।उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी जमीन वापस नहीं करती, तो BAP मूल रैयतों के साथ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।
2005-07 के आसपास मनोहरपुर में कई बड़ी कंपनियों (एलएन मित्तल, टाटा स्टील, एस्सार स्टील, सेल, एनएमडीसी, वेदांता आदि) ने निवेश के एमओयू किए, लेकिन ज्यादातर परियोजनाएं जमीन पर नहीं उतरीं। इससे क्षेत्र की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 101 के तहत भी ऐसी जमीन वापस करने का प्रावधान है, जिसे रैयत जायज मान रहे हैं।
रैयतों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे, अन्यथा वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। स्थानीय प्रशासन अभी तक कोई आधिकारिक बयान देने की स्थिति में नहीं है।
