पश्चिम बंगाल में SIR पर भारी विवाद: फॉर्म-7 जमा करने को लेकर BJP-TMC में हिंसक झड़पें, कांग्रेस ने कोलकाता में किया प्रदर्शन

कोलकाता, 20 जनवरी 2026

 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची संशोधन पर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। फॉर्म-7 (जिसके जरिए किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर आपत्ति या मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की जाती है) जमा करने की अंतिम तिथि सोमवार (19 जनवरी 2026) को कई जिलों में हिंसक झड़पों और प्रदर्शनों में बदल गई। भाजपा लगातार चुनाव आयोग से समय बढ़ाने की मांग कर रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।

BJP की मांग और TMC का आरोप

भाजपा का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में फर्जी और अवैध नाम (खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों के) शामिल हैं, इसलिए फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। पार्टी ने दावा किया कि TMC कार्यकर्ता सरकारी कार्यालयों को घेरकर BJP कार्यकर्ताओं को फॉर्म जमा करने से रोक रहे हैं, हमला कर रहे हैं और दस्तावेज फाड़ रहे हैं। मुर्शिदाबाद, आसनसोल, पूर्वी बर्धमान, बीरभूम, जामुड़िया और अन्य जिलों में झड़पें हुईं, जहां TMC पर BJP कार्यकर्ताओं पर हमला और फॉर्म-7 जलाने का आरोप लगा।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलकर फॉर्म-7 जमा करने की समयसीमा कम से कम एक सप्ताह बढ़ाने की मांग की। पार्टी का कहना है कि कई जगहों पर अधिकारी कार्यालय छोड़कर जा रहे हैं या फॉर्म स्वीकार नहीं कर रहे, जिससे वैध आपत्तियां दर्ज नहीं हो पा रही हैं।

दूसरी ओर, TMC ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी बल्क में फॉर्म-7 जमा कर वैध मतदाताओं (खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के) के नाम हटाने की साजिश रच रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही SIR को “BJP के इशारे पर” चलाया जा रहा “अमानवीय” अभियान बताया था। TMC का दावा है कि भाजपा 25,000 से अधिक वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रही है।

कोलकाता में कांग्रेस का प्रदर्शन

उधर, कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और मांग की कि प्रक्रिया पारदर्शी हो। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कहा कि मतदाता सूची संशोधन में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

SIR की पृष्ठभूमि और अदालती आदेश

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान ड्राफ्ट रोल में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” कैटेगरी में 1.25 करोड़ से अधिक नाम फ्लैग हुए थे, जिससे विवाद बढ़ा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इन नामों की पूरी सूची प्रकाशित की जाए और प्रभावित मतदाताओं को सुनवाई का मौका दिया जाए। क्लेम-ऑब्जेक्शन की समयसीमा 15 जनवरी से बढ़ाकर 19 जनवरी कर दी गई थी। आपत्तियों की सुनवाई 7 फरवरी तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।

यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गरम कर रहा है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर “वोटर चोरी” और “लोकतंत्र की हत्या” का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पंजीकृत मतदाता द्वारा फॉर्म-7 की कोई संख्या सीमा नहीं है, लेकिन 5 से अधिक फॉर्म पर स्वत: समीक्षा

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *