इस्लामाबाद, 12 अप्रैल 2026
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का एक महत्वपूर्ण दौर 21 घंटे तक चला, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संवाददाताओं से कहा कि दोनों पक्षों के बीच सब्स्टैंटिव चर्चाएं हुईं, लेकिन ईरान अमेरिकी शर्तों को मानने को तैयार नहीं हुआ।
वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “हम 21 घंटे तक बातचीत करते रहे। अच्छी खबर यह है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ कई गंभीर चर्चाएं हुईं। बुरी खबर यह है कि कोई समझौता नहीं हो सका।” उन्होंने कहा कि अमेरिका ने “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” रखा है और अब देखना होगा कि ईरान इसे स्वीकार करता है या नहीं। वेंस ने जोर देकर कहा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने की अमेरिकी “रेड लाइन” को मानने से इनकार कर रहा है।
यह वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई, जो हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जिनके साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल थे। ईरानी पक्ष की अगुवाई संसद अध्यक्ष मोहम्मद बग़र गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने की।
वार्ता सेरेना होटल में हुई और यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका-ईरान के बीच उच्चतम स्तर की आमने-सामने की बैठक मानी जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों से अलग-अलग मुलाकात की और मध्यस्थता की भूमिका निभाई। वेंस ने पाकिस्तान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री शरीफ और मुनीर की भूमिका सराहनीय रही।
वेंस ने बताया कि पूरे 21 घंटों के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से आधा दर्जन से एक दर्जन बार बात की, साथ ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रेजरी सचिव और सेंट्रल कमांड प्रमुख से भी संपर्क बनाए रखा। उन्होंने कहा, “हम अच्छी नीयत से आए थे, लेकिन ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखानी होगी।”
यह वार्ता मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच हुई, जिसमें लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात की धीमी गति और दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर का मुद्दा शामिल था। ईरान ने अपनी कुछ “नॉन-नेगोशिएबल” शर्तें रखी थीं, जबकि अमेरिका ने परमाणु हथियार न विकसित करने की मांग पर अड़ा रहा।
वार्ता बेनतीजा खत्म होने के बावजूद दोनों पक्षों ने आगे की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। वेंस ने कहा कि अमेरिकी डेलिगेशन अब पाकिस्तान से रवाना हो रहा है, लेकिन प्रस्ताव अभी भी ईरान के पास है।
पाकिस्तान ने इस मध्यस्थता को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया है, क्योंकि दोनों दुश्मन देशों को एक मेज पर लाना आसान नहीं था। क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों (खासकर तेल आपूर्ति) पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह वार्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
