केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल चूक पर सख्ती

नई दिल्ली/कोलकाता, 08 मार्च 2026

 

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अगवानी और कार्यक्रम व्यवस्थाओं में हुई प्रोटोकॉल चूक पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों के अनुसार, यह रिपोर्ट आज (8 मार्च 2026) शाम 5 बजे तक गृह मंत्रालय को सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने पहुंची थीं। यह कार्यक्रम मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में निर्धारित था, लेकिन सुरक्षा और अन्य लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर (गोस्सेनपुर) में शिफ्ट कर दिया गया।कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने राज्य सरकार की ओर से प्रोटोकॉल में कमी पर नाराजगी जताई। प्रोटोकॉल के अनुसार, राष्ट्रपति के सार्वजनिक दौरे पर मुख्यमंत्री या कोई वरिष्ठ मंत्री उनकी अगवानी के लिए मौजूद रहना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा, नए स्थान पर व्यवस्थाओं को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया, जिससे कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान जरूरी है।

इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताते हुए टीएमसी सरकार पर “सारी हदें पार करने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण जैसे मुद्दे पर लापरवाही दुर्भाग्यपूर्ण है।

केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और गृह सचिव के पत्र में आयोजन स्थल बदलाव, स्वागत व्यवस्था और अन्य प्रोटोकॉल संबंधी मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो केंद्र-राज्य के बीच तनाव बढ़ सकता है।यह घटना संथाल संस्कृति और आदिवासी सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण आयोजन को राजनीतिक रंग देने के आरोपों के बीच सामने आई है।

 

 

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