पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना में राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ गाना अनिवार्य

कोलकाता, 7 नवंबर 2025
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा में रवींद्रनाथ टैगोर रचित राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ को गाना अनिवार्य कर दिया है। पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) ने गुरुवार को इस संबंध में सभी स्कूल प्रधानों को निर्देश जारी किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुमति से लिया गया यह फैसला बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है।
शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया, “माननीया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुमति से अब पश्चिम बंगाल के हर सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में 1905 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित प्रसिद्ध गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ को स्कूल शुरू होने से पहले प्रार्थना गीत के रूप में गाने की मंजूरी दी गई है।” उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के साथ राज्य गीत का नियमित गायन सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने का विशेष उत्प्रेरक बनेगा।
बोर्ड का आधिकारिक निर्देश
WBBSE की अधिसूचना में कहा गया है, “सभी संबंधित अपर प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के प्रधानों को निर्देश दिया जाता है कि वे सुबह की सभा में राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ को नियमित रूप से गाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें। यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।” यह निर्देश सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू है।
 
उद्देश्य और प्रतिक्रियाएं
सरकार का मानना है कि यह कदम छात्रों में बंगाल की मिट्टी, भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व और एकता की भावना जगाएगा। कई विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक बताया, जबकि कुछ का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बंगाली भावनाओं को जगाने की कोशिश है। भारत के कई राज्य जैसे असम, उत्तराखंड, गुजरात, बिहार आदि के पास पहले से राज्य गीत हैं। पश्चिम बंगाल लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था।स्कूलों में अब रोजाना राष्ट्रीय गान के साथ राज्य गीत गाकर छात्र बंगाल की समृद्ध विरासत से जुड़ेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य गीत का इतिहास

  • गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने यह गीत 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में रचा था।
  • सितंबर 2023 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में नागरिक सम्मेलन में इसे राज्य गीत चुना गया।
  • विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर इसे आधिकारिक दर्जा दिया। गीत का एक विशेष भाग (‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल, बांग्लार बायु, बांग्लार फल…’) ही राज्य गीत के रूप में गाया जाएगा, जो करीब 2 मिनट का है।
  • दिसंबर 2023 से राज्य सरकार के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत में इसे गाना अनिवार्य है, जबकि समापन राष्ट्रीय गान से होता है।

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