नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2025
दिवाली के बाद से दिल्ली की हवा में जहर घुलने के बीच प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए क्लाउड सीडिंग का दूसरा ट्रायल मंगलवार को किया गया। कानपुर से विशेष रूप से तैयार किया गया ‘सेसना’ विमान दोपहर करीब 2 बजे उड़ा और दिल्ली के खेकड़ा, बुराड़ी और मयूर विहार इलाकों के ऊपर 6,000 फीट की ऊंचाई पर बादलों में केमिकल छिड़काव किया। लेकिन ट्रायल के 6 घंटे बीतने के बाद भी शाम तक बारिश नहीं हुई। आईआईटी कानपुर और दिल्ली सरकार ने कहा था कि छिड़काव के बाद कभी भी कृत्रिम बारिश हो सकती है, लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया।
दिल्ली का एक्यूआई (AQI) मंगलवार को भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बना रहा। सफर इंडिया के अनुसार, सुबह 9 बजे आनंद विहार में AQI 428, जहांगीरपुरी में 415 और आरके पुरम में 398 दर्ज किया गया। पीएम 2.5 का स्तर WHO के सुरक्षित मानक से 15 गुना ज्यादा था। पराली जलाने, वाहनों के धुएं और कम हवा की गति ने मिलकर दिल्ली को गैस चैंबर बना दिया है।
क्लाउड सीडिंग क्या है और कैसे काम करता है?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें बादलों में सिल्वर आयोडाइड या कैल्शियम क्लोराइड जैसे केमिकल छिड़के जाते हैं, जिससे बादलों में पानी की बूंदें बनती हैं और बारिश होती है। यह तकनीक अमेरिका, चीन और ऑस्ट्रेलिया में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रही है। दिल्ली में पहली बार इसका ट्रायल 23 अक्टूबर को हुआ था, जिसमें भी बारिश नहीं हुई थी।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने बताया, “दूसरे ट्रायल में हमने ज्यादा सटीक मौसम डेटा का इस्तेमाल किया। बादलों में नमी थी, लेकिन हवा की दिशा और तापमान अनुकूल नहीं रहा। फिर भी डेटा संग्रह सफल रहा। अगले ट्रायल में सुधार करेंगे।”
ट्रायल की पूरी प्रक्रिया
| चरण | विवरण |
| विमान | सेसना 172 (कानपुर से उड़ान) |
| केमिकल | सिल्वर आयोडाइड और कैल्शियम क्लोराइड (800 ग्राम) |
| क्षेत्र | खेकड़ा (बागपत), बुराड़ी, मयूर विहार |
| ऊंचाई | 6,000 फीट (1.8 किमी) |
| समय | दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक |
| अपेक्षित परिणाम – | 4 घंटे में बारिश |
| वास्तविक परिणाम | – शाम 7 बजे तक कोई बारिश नहीं |
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्लाउड सीडिंग एक प्रयोग है। पहला ट्रायल 23 अक्टूबर को हुआ, दूसरा आज। हम वैज्ञानिकों के साथ मिलकर लगातार डेटा विश्लेषण कर रहे हैं। अगर मौसम अनुकूल रहा तो नवंबर में और ट्रायल होंगे।”
क्यों नहीं हुई बारिश?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार:
- बादलों में नमी की मात्रा अपेक्षा से कम थी।
- हवा की गति बहुत कम (5-7 किमी/घंटा) थी, जिससे केमिकल फैल नहीं सका।
- तापमान ज्यादा रहा, जिससे बूंदें बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ी।
आईएमडी के निदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, “क्लाउड सीडिंग तभी सफल होती है जब बादल क्यूमुलस प्रकार के हों और नमी 60% से ऊपर हो। आज की स्थिति आंशिक रूप से अनुकूल थी।”
दिल्ली में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति
- AQI औसत: 380-420 (बेहद खराब)
- मुख्य स्रोत: पराली जलाना (35%), वाहन (25%), उद्योग (15%)
- स्वास्थ्य प्रभाव: 2 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित, अस्पतालों में सांस की बीमारियां 40% बढ़ीं
- GRAPE चरण 3 लागू: निर्माण कार्य रोके, BS-3 पेट्रोल/BS-4 डीजल वाहन प्रतिबंधित
आगे की योजना
दिल्ली सरकार ने घोषणा की है:
- नवंबर में 2 और ट्रायल (मौसम अनुकूल होने पर)
- ड्रोन से मॉनिटरिंग और एंटी-स्मॉग गन का विस्तार
- वर्क फ्रॉम होम और ऑड-ईवन पर विचार
- पड़ोसी राज्यों से पराली जलाने पर सख्ती
विशेषज्ञों की राय
सीएसई की अनुमिता रॉय चौधरी कहती हैं कि “क्लाउड सीडिंग अस्थायी समाधान है। असली जरूरत है पराली प्रबंधन और वाहन नियंत्रण की।” वंही आईआईटी दिल्ली के प्रो. एस. एन. त्रिपाठी उम्मीद जताते हैं कहते हैं कि “ट्रायल से डेटा मिल रहा है। 2-3 और प्रयासों में सफलता मिल सकती है।” क्लाउड सीडिंग दिल्ली के लिए नई उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह चमत्कार नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रयोग है। असली राहत के लिए लंबी नीतियों की जरूरत है।
