ईरान-अमेरिका के बीच दो हफ्ते का सीजफायर, होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल की कीमतों में भारी गिरावट

अप्रैल 8, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय (लगभग 40 दिन) से चली आ रही जंग में अचानक बड़ा ब्रेक लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार रात Truth Social पर घोषणा की कि अमेरिका ईरान पर हमले और बमबारी दो हफ्ते के लिए रोक रहा है। यह फैसला ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने की शर्त पर लिया गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी इस सीजफायर की पुष्टि की और कहा कि हमले रुकने पर ईरान अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगा तथा दो हफ्ते तक स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करेगा।

ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा, “पाकिस्तान की अपील पर मैं आज रात ईरान पर भेजे जा रहे विनाशकारी बल को रोक रहा हूं।” उन्होंने इसे “दोतरफा सीजफायर” बताया और कहा कि ईरान की तरफ से 10-पॉइंट पीस प्लान भी आया है, जिस पर आगे बातचीत होगी। दोनों पक्षों की अगली वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को होनी है।
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिसमें से लगभग 20-25% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। जंग के दौरान ईरान ने इस पर यातायात रोक दिया था, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं। सीजफायर और स्ट्रेट के खुलने की खबर आते ही ग्लोबल ऑयल प्राइस में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्टॉक मार्केट्स में उछाल आया।

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी सीजफायर स्वीकार कर लिया है। तेहरान का कहना है कि स्ट्रेट से सुरक्षित पासेज ईरान के सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए होगा। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि ईरान और ओमान दोनों शिपिंग पर फीस वसूल सकते हैं।
जंग की पृष्ठभूमि

यह सीजफायर उस समय आया है जब ट्रंप ने कुछ घंटे पहले ही ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट नहीं खुला तो “पूरी सभ्यता को मिटा देंगे” और ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए जाएंगे। पाकिस्तान की मध्यस्थता से आखिरी समय में समझौता हो गया। यह युद्ध लगभग 40 दिनों से चल रहा था।

शांति की दिशा में उठे कदम
यह दो हफ्ते का सीजफायर स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है, लेकिन दोनों तरफ सतर्कता बरती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बातचीत सफल रही तो मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। हालांकि, इजराइल और ईरान समर्थित प्रॉक्सी ग्रुप्स की गतिविधियां अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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