नासिक-मुंबई लॉन्ग मार्च: 5वें दिन कसारा पहुंचा हजारों आदिवासी किसानों का जत्था, 3 फरवरी तक मुंबई में घेराव की तैयारी

नासिक/मुंबई, 27 जनवरी 2026

 

महाराष्ट्र में आदिवासी किसानों का ‘लॉन्ग मार्च’ तेजी से आगे बढ़ रहा है। नासिक जिले से शुरू हुआ यह मार्च आज (27 जनवरी 2026) अपने पांचवें दिन घाटनदेवी-कसारा (Kasara Ghat) क्षेत्र पहुंच गया है। हजारों प्रदर्शनकारी लाल झंडे लहराते हुए मुंबई-आगरा हाईवे पर पैदल चल रहे हैं, जिससे हाईवे पर 8-10 किलोमीटर तक जाम लगा रहा। मार्च में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, और वे महीने भर का राशन साथ लेकर निकले हैं।

मार्च अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेतृत्व में चल रहा है। प्रमुख नेता डॉ. अशोक धवाले, पूर्व विधायक जे.पी. गावित, डॉ. अजित नवले, उमेश देशमुख आदि इसमें सक्रिय हैं। प्रदर्शनकारियों ने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) भी हाईवे पर मनाया, जहां तिरंगा फहराया और अम्बेडकर व शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

वर्तमान स्थिति और लोकेशन:

  • मार्च ने पिछले कुछ दिनों में करीब 60 किलोमीटर की दूरी तय की है।
  • आज सुबह कसारा घाट से नीचे उतरना शुरू किया और घाटनदेवी से लगभग 3 किलोमीटर आगे पहुंचा।
  • शाम तक कसारा में पड़ाव डाला गया है।
  • मार्च ठाणे जिले में प्रवेश कर चुका है और मुंबई की ओर बढ़ रहा है।
  • अनुमान है कि यह 2-3 फरवरी 2026 के बीच मुंबई पहुंचेगा, जहां मंत्रालय या विधानसभा का घेराव करने की योजना है। कुछ रिपोर्टों में 3 फरवरी को मुंबई में ताकत दिखाने की बात कही गई है।

प्रमुख मांगें:

  • वन अधिकार अधिनियम (FRA) के लंबित दावों का तुरंत निपटारा और भूमि पट्टे जारी करना।
  • वन भूमि पर खेती करने वालों को मालिकाना हक।
  • सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना, पानी का समान वितरण।
  • कर्ज माफी, MSP की गारंटी, MGNREGA बहाली।
  • स्मार्ट मीटर हटाना, भूमि अधिग्रहण रोकना, नई लेबर कोड्स वापस।
  • आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, नौकरी और बुनियादी सुविधाओं की मांग।
  • केंद्र और राज्य की BJP सरकारों पर “प्रो-कॉर्पोरेट” (अडानी-अंबानी समर्थक) नीतियों का विरोध।

सरकार की प्रतिक्रिया:

महाराष्ट्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के शिष्टमंडल को आज (27 जनवरी) मंत्रालय में बातचीत के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस या अन्य मंत्री स्तर पर बैठक हो सकती है। नेता जे.पी. गावित ने कहा कि मीडिया कवरेज और लगातार दबाव के कारण सरकार बातचीत के लिए मजबूर हुई है। हालांकि, मार्च जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं।

प्रभाव:

  • हाईवे पर भारी ट्रैफिक जाम, पर्यटक और यात्री घंटों फंसे रहे।
  • पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई और हाईवे को एक तरफा चलाने की व्यवस्था की।
  • मार्च में शामिल लोगों की संख्या 20,000 से 40,000 तक बताई जा रही है (विभिन्न स्रोतों के अनुसार)।

यह मार्च 2018 के ऐतिहासिक किसान लॉन्ग मार्च की याद दिलाता है, जब हजारों किसान मुंबई पहुंचे थे और कई वादे किए गए थे, लेकिन नेता कहते हैं कि वे अभी तक अधूरे हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और मुंबई पहुंचने पर बड़ा आंदोलन संभव है।

 

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