तेहरान, 1 मार्च 2026
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमलों में मौत के बाद, ईरान ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अंतरिम लीडरशिप व्यवस्था लागू की है। ईरानी राज्य मीडिया (ISNA) के अनुसार, वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी को लीडरशिप काउंसिल (Leadership Council) के ज्यूरिस्ट सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। यह काउंसिल सर्वोच्च नेता की भूमिका निभाएगी जब तक कि एक्सपर्ट्स असेंबली (Assembly of Experts) स्थायी उत्तराधिकारी का चुनाव नहीं कर लेती।
अराफी अब इस तीन सदस्यीय अंतरिम काउंसिल का हिस्सा हैं, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और न्यायाधीश प्रमुख गोलामहुसैन मोहसिनी-एजेई भी शामिल हैं। ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत यह व्यवस्था की गई है, जो अचानक सर्वोच्च नेता की अनुपस्थिति में अंतरिम शासन सुनिश्चित करती है।
अलीरेजा अराफी कौन हैं?
- आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी (67 वर्ष) एक प्रमुख शिया धर्मगुरु हैं, जो गार्जियन काउंसिल (Guardian Council) के सदस्य, एक्सपर्ट्स असेंबली के उपाध्यक्ष और ईरान के सेमिनरी सिस्टम के प्रमुख हैं।
- वे बसिज (Basij) के प्रमुख भी रहे हैं और खामेनेई के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
- अराफी को कई रिपोर्ट्स में खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारियों में से एक के रूप में देखा जाता रहा है, हालांकि स्थायी नेता का फैसला एक्सपर्ट्स असेंबली करेगी।
- उनकी नियुक्ति को ईरान में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब देश अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष और 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक में है।
पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को तेहरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में हुई, जिसमें लगभग 40 अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए। ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए हैं और पूरे देश में अंतिम संस्कार और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच, क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है, जिसमें पाकिस्तान के कराची और स्कर्दू में प्रो-ईरान प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं।
ईरानी राज्य मीडिया ने पुष्टि की है कि अराफी की नियुक्ति एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल द्वारा की गई है। यह कदम ईरान को युद्धकालीन स्थिति में नेतृत्व का वैध ढांचा प्रदान करता है।
