नई दिल्ली, 12 जनवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ व्यवस्था लागू करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।यह याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है, जिसमें उन्होंने तर्क दिया है कि SC/ST समुदायों में भी आर्थिक रूप से संपन्न और उच्च पदों पर पहुंच चुके परिवारों (क्रीमी लेयर) को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए, ताकि इसका असली फायदा सबसे पिछड़े और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
याचिका के मुख्य तर्क
- OBC आरक्षण में 1992 के इंद्रा साहनी मामले (मंडल कमीशन) के फैसले के बाद से ‘क्रीमी लेयर’ लागू है, जहां सालाना आय 8 लाख रुपये से अधिक होने पर आरक्षण नहीं मिलता।
- SC/ST आरक्षण में अभी तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे आरक्षण का लाभ बार-बार उसी संपन्न वर्ग को मिलता रहता है।
- याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर कोई SC/ST परिवार का सदस्य पहले से ही उच्च संवैधानिक पद, सरकारी नौकरी या संपन्न स्थिति में पहुंच चुका है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का फायदा नहीं मिलना चाहिए।
- इससे आरक्षण का उद्देश्य विफल हो रहा है और सामाजिक-आर्थिक असमानता बढ़ रही है।
अदालत की टिप्पणी और बेंच
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जोयमलया बागची की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि SC/ST में क्रीमी लेयर को बाहर करने से राष्ट्रीय, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गंभीर परिणाम हो रहे हैं, जिसमें “एलिट कैप्चर” (संपन्न वर्ग द्वारा आरक्षण पर कब्जा) शामिल है।
पिछला संदर्भ और केंद्र का रुख
- अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट के 6:1 बहुमत वाले फैसले (पंजाब बनाम दविंदर सिंह) में SC/ST में सब-क्लासिफिकेशन (उप-वर्गीकरण) को वैध ठहराया गया था। कोर्ट ने कहा था कि SC/ST में भी ‘क्रीमी लेयर’ जैसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है, लेकिन OBC से अलग基準 पर।
- अगस्त 2024 में ही केंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक के बाद स्पष्ट किया था कि वह SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं करेगी।
- केंद्र ने पहले भी कई बार कोर्ट से कहा है कि SC/ST आरक्षण सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक, इसलिए क्रीमी लेयर लागू नहीं होना चाहिए।
क्या होगा आगे?
यह मामला आरक्षण नीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। अगर सुप्रीम कोर्ट क्रीमी लेयर को SC/ST में लागू करने का निर्देश देता है, तो लाखों परिवारों की आरक्षण पात्रता प्रभावित हो सकती है। वहीं, कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इसे SC/ST के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। अगली सुनवाई में केंद्र और राज्यों के जवाब के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी। यह याचिका आरक्षण बहस को फिर से गरमा सकती है, खासकर जब कई राज्य चुनावी मोड में हैं।
