संताली साहित्य की प्रमुख हस्ति सुमित्रा सोरेन को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित

बारीपदा/नई दिल्ली, 17 मार्च 2026

 

संताली भाषा की प्रसिद्ध कवियत्री और लेखिका सुमित्रा सोरेन को उनके लघुकथा संग्रह “मिड बिरना चेन्ने साओन इनाग सागाई” (Mid Birna Chenne Saon Inag Sagai) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार संताली भाषा की श्रेणी में लघुकथा (शॉर्ट स्टोरीज) के लिए दिया गया है। साहित्य अकादमी ने 16 मार्च 2026 को 24 भारतीय भाषाओं में कुल 24 पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें सुमित्रा सोरेन का नाम प्रमुखता से शामिल है। हलांकि सुमित्रा सोरेन दो यह पुरस्कार उनके निधन के बाद मिला है। यह पुरस्कार नई दिल्ली में 31 मार्च 2026 को आयोजित समारोह में प्रदान किया जायेगा।

जीवन और योगदान

सुमित्रा सोरेन का जन्म 15 फरवरी 1970 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बारीपदा (श्रीपदा) में स्वर्गीय लोकनाथ मरांडी और दुलारी मरांडी के घर हुआ था। उन्होंने संताली साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं:

  • मिड बिरना चेन्ने साओन इनाग सागाई (लघुकथा संग्रह) – यह पुस्तक झारखंड के जमशेदपुर से प्रकाशित संताली लघुकथा संग्रह में शामिल थी, जिसमें उनकी लघुकथा “कोयल” भी थी।
  • गुपी गिद्रावग कुकमु (छोटी कहानियों का संग्रह)।
  • रेंगेज होराग मेड्डाग (कविताएँ संग्रह)।

वे संताली भाषा के विकास, आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और भाषा के बचाव के लिए सक्रिय रहीं। उन्होंने साहित्य अकादमी के संताली कविता सम्मेलनों में भाग लिया और अपनी कविताएँ सुनाईं।

पुरस्कार का महत्व

सुमित्रा सोरेन का निधन 26 जुलाई 2023 को हो गया था, इसलिए यह पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किया गया है। उनके परिवार और प्रशंसकों में खुशी की लहर है। उनके पति मदनमोहन सोरेन वर्तमान में बारीपदा में लाइफ इंश्योरेंस ऑफ इंडिया में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उनका इकलौता बेटा हिमांशु (26 वर्ष) है।

यह पुरस्कार ओडिशा, झारखंड और अन्य आदिवासी क्षेत्रों में संताली भाषा और साहित्य को नई ऊर्जा देगा। साहित्य अकादमी के अनुसार, पुरस्कार में ताम्र पट्टिका, शॉल और नकद राशि शामिल है। सम्मान समारोह 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में होगा।साहित्य अकादमी की आधिकारिक घोषणा में संताली के लिए यह कृति लघुकथा विधा में चुनी गई है, जो संताली साहित्य में उनकी प्रमुख उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देती है।

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