नई दिल्ली/वाराणसी, 3 फरवरी 2026
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 के समर्थन में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) सहित देशभर के कई कैंपस में छात्रों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला है। SC, ST और OBC छात्र संगठन इन नियमों को उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में लगाई गई रोक हटाई जाए और नियम तुरंत लागू किए जाएं।

UGC रेगुलेशंस 2026 क्या हैं?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित इन नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में जातिगत भेदभाव को समाप्त करना और समानता (equity) को बढ़ावा देना है।
प्रमुख प्रावधान:
- सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमिटी का गठन अनिवार्य, जिसमें OBC, SC, ST, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य।
- जातिगत भेदभाव की परिभाषा में पहली बार OBC को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया (पहले 2012 नियमों में मुख्यतः SC-ST पर फोकस था)।
- भेदभाव की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन, समयबद्ध जांच और कार्रवाई की व्यवस्था।
- नियमों का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना है।
ये नियम सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों (जैसे रोहित वेमुला, पायल तडवी जैसे मामलों) के बाद तैयार किए गए थे, जहां OBC छात्रों को भी भेदभाव से सुरक्षा की मांग उठी थी।

प्रदर्शन की प्रमुख बातें
- दिल्ली यूनिवर्सिटी: DU के नॉर्थ कैंपस, JNU और अन्य कॉलेजों में SC/ST/OBC छात्रों ने रैली निकाली। उन्होंने नारे लगाए – “UGC नियम लागू करो, भेदभाव रोक दो!” और “सामाजिक न्याय अब होगा!” प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 29 जनवरी की रोक से वंचित वर्गों की जीती हुई लड़ाई छीनी जा रही है।
- बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU): वाराणसी में BHU परिसर में SC/ST/OBC एकता मंच के बैनर तले बड़ी रैली निकाली गई। छात्रों ने तख्तियां उठाईं – “SUPPORT UGC REGULATIONS 2026 – तुरंत लागू करो”। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भारी पुलिस बल तैनात था। छात्रों ने आरोप लगाया कि नियम लागू न होने से कैंपस में भेदभाव जारी रहेगा।
- देशभर में फैलाव: लखनऊ, पटना, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के कई विश्वविद्यालयों में भी समर्थन प्रदर्शन हुए। Jantar Mantar पर 31 जनवरी को छात्र-शिक्षक एकजुट हुए और रोहित एक्ट की मांग की।

विरोध vs समर्थन का द्वंद्व
नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी के छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध किया था, जिसमें UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं (BHU के शोधार्थी मृत्युंजय तिवारी सहित) और BJP के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे शामिल थे। उनका आरोप था कि नियम “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा देंगे और फर्जी शिकायतों का खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को नियमों पर स्टे लगाते हुए कहा कि कुछ प्रावधान “अस्पष्ट” हैं और दुरुपयोग की आशंका है। कोर्ट ने केंद्र से 19 मार्च तक जवाब मांगा और फिलहाल 2012 नियम लागू रहेंगे।

छात्रों की मांग
प्रदर्शनकारी SC/ST/OBC छात्रों ने कहा:
- नियम संविधानसम्मत हैं और OBC को पहली बार सुरक्षा मिल रही है।
- स्टे हटाकर तुरंत लागू किया जाए।
- उच्च शिक्षा में आरक्षण और समानता को मजबूत करने के लिए “रोहित एक्ट” जैसे कानून की जरूरत।
- भेदभाव रोकने से कैंपस सुरक्षित और समावेशी बनेगा।
यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां एक तरफ सामाजिक न्याय की मांग और दूसरी तरफ “समानता” के नाम पर विरोध है। UGC और शिक्षा मंत्रालय पर अब दबाव बढ़ गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष रखें।
