नई दिल्ली, 25 जनवरी 2026
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और करेक्शनल सर्विस के 982 कर्मियों को गैलेंट्री अवॉर्ड्स और सेवा मेडल से सम्मानित किया है। इनमें 125 वीरता पदक (गैलेंट्री मेडल्स) शामिल हैं, जो जान जोखिम में डालकर अपराध रोकने, जान-माल बचाने या अपराधियों को गिरफ्तार करने जैसे दुर्लभ और साहसपूर्ण कार्यों के लिए दिए जाते हैं। सबसे अधिक 45 पदक जम्मू-कश्मीर के ऑपरेशन थिएटर में तैनात कर्मियों को मिले, जहां आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनकी भूमिका सराहनीय रही। इसके बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 35 और पूर्वोत्तर क्षेत्र के 5 कर्मियों को सम्मानित किया गया। फायर ब्रिगेड के 4 बचावकर्मियों को भी वीरता पदक दिए गए।
इस बार के पुरस्कारों में कई महत्वपूर्ण मामलों में पुलिस अधिकारियों की बहादुरी उजागर हुई है। हालांकि आधिकारिक सूचियों में सभी प्राप्तकर्ताओं के नाम और उनके संगठन दिए गए हैं, लेकिन कुछ प्रमुख मामलों में स्पष्ट रूप से पदक दिए गए हैं। यहां कुछ प्रमुख मामलों का सूची शामिल है
1. आरजी कर अस्पताल मामला (कोलकाता रेप-मर्डर केस)
- सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए डॉक्टर के रेप और मर्डर मामले की जांच की निगरानी की, को पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया है। यह मामला 2024 में हुआ था, जिसमें एक ट्रेनी डॉक्टर की हत्या ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया था। अधिकारी की जांच ने मामले में महत्वपूर्ण सबूत जुटाए और न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस पुरस्कार से सीबीआई की जांच क्षमता को मान्यता मिली है, और कुल 31 सीबीआई अधिकारियों को विभिन्न सेवा मेडल दिए गए, जिनमें आरजी कर जैसे संवेदनशील मामलों में योगदान शामिल है।
2. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान
- जम्मू-कश्मीर पुलिस को सबसे अधिक 33 गैलेंट्री मेडल मिले, जो मुख्य रूप से आतंकवादी मुठभेड़ों और घुसपैठ रोकने के अभियानों में दिखाई गई बहादुरी के लिए हैं। उदाहरण के तौर पर, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस जाविद अहमद लोन, मोहम्मद अशरफ, और मोहन लाल; इंस्पेक्टर यूनिस खान; असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर अनिल शर्मा जैसे अधिकारियों को सम्मानित किया गया। ये पदक पुलवामा, शोपियां और बारामूला जैसे क्षेत्रों में हुए एनकाउंटरों में आतंकवादियों को मार गिराने या खुफिया जानकारी जुटाने के लिए दिए गए हैं। कुल 52 जम्मू-कश्मीर पुलिस कर्मियों को विभिन्न मेडल मिले, जो क्षेत्र में सुरक्षा बलों की चुनौतियों को दर्शाते हैं।
3. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-नक्सल ऑपरेशंस
- नक्सल हिंसा प्रभावित इलाकों जैसे छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र में तैनात पुलिस अधिकारियों को 35 पदक मिले। ये मुख्य रूप से नक्सलियों के साथ मुठभेड़ों, आईईडी डिफ्यूज करने और गांवों की सुरक्षा में दिखाई गई वीरता के लिए हैं। महाराष्ट्र पुलिस को 31 पदक मिले, जो राज्य में नक्सल प्रभाव को कम करने के अभियानों में योगदान के लिए हैं। सीआरपीएफ को 12 गैलेंट्री साइटेशन मिले, जो केवल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में दिए गए। ये ऑपरेशंस दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे क्षेत्रों में हुए, जहां पुलिस ने नक्सली हमलों का मुकाबला किया।
4. पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा अभियान
- पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम और मणिपुर में तैनात 5 कर्मियों को पदक मिले, जो मुख्य रूप से उग्रवादी समूहों के खिलाफ अभियानों में बहादुरी के लिए हैं। ये पदक सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में दिए गए, जहां अधिकारियों ने घुसपैठ और विद्रोह को रोका।
5. फायर ब्रिगेड रेस्क्यू ऑपरेशंस
- फायर सर्विस के 4 बचावकर्मियों को वीरता पदक मिले, जो मुख्य रूप से आग लगने की घटनाओं, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदाओं में जान बचाने के लिए दिए गए। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली फायर सर्विस या महाराष्ट्र फायर ब्रिगेड के सदस्यों ने ऊंची इमारतों से रेस्क्यू या रसायनिक आग बुझाने जैसे जोखिम भरे कार्यों में हिस्सा लिया।
इनके अलावा, अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश (18 पदक), दिल्ली (14 पदक) और आंध्र प्रदेश के अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। आंध्र प्रदेश से एएसपी आरएमके तिरुमलाचारी, एडिशनल एसपी जीएस प्रकाश राव और सब-इंस्पेक्टर दामोदर रेड्डी जैसे नाम शामिल हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार, ये पुरस्कार कर्मियों की समर्पण और जोखिम उठाने की भावना को सम्मान देते हैं। गणतंत्र दिवस परेड में इन वीरों को सम्मानित किया जाएगा, जो राष्ट्र की सुरक्षा में उनके योगदान की याद दिलाएगा।
