जमशेदपुर, 21 जनवरी 2026
झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी (Dalma Wildlife Sanctuary) में एक दुर्लभ और आकर्षक मांसाहारी पौधे ‘ड्रोसेरा बर्मानी’ (Drosera burmannii) की खोज हुई है। यह पौधा कीटों, लार्वा और छोटे सूक्ष्म जीवों को फंसाकर उनका भक्षण करता है, जिससे यह जैव विविधता के अध्ययन में महत्वपूर्ण हो गया है।
दलमा फॉरेस्ट रिजर्व के पटमदा और बालीगुमा क्षेत्रों में इस पौधे की मौजूदगी दर्ज की गई है। फॉरेस्ट गार्ड सह शोधार्थी राजा घोष ने बताया कि दलमा के जंगलों में यह मांसाहारी पौधा कई स्थानों पर पाया गया है। दलमा का यह इलाका अब जैव विविधता के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां कम पोषक तत्व वाली, अम्लीय मिट्टी में ऐसे पौधे पनपते हैं।
ड्रोसेरा बर्मानी, जिसे आमतौर पर ‘संड्यू’ (Sundew) भी कहा जाता है, अपने चिपचिपे बालों (tentacles) से शिकार को आकर्षित करता है। जैसे ही कोई कीट या छोटा जीव इसके संपर्क में आता है, पौधा धीरे-धीरे अपनी पत्तियों को मोड़कर उसे घेर लेता है और पाचन प्रक्रिया शुरू कर देता है। यह पौधा मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए कीटों पर निर्भर रहता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि दलमा में इस पौधे की खोज से क्षेत्र की पारिस्थितिकी के बारे में नई जानकारी मिलेगी। पहले भी दलमा में 200 से अधिक प्रकार की दुर्लभ तितलियां और विभिन्न जड़ी-बूटियां मिल चुकी हैं, लेकिन मांसाहारी पौधे की यह खोज इसे और खास बना रही है। कुछ रिपोर्ट्स में दलमा के जंगलों में 500 से अधिक ऐसे पौधों की मौजूदगी का जिक्र है, जिसके बाद संबंधित क्षेत्रों को सुरक्षित घोषित किया गया है और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी, जो जमशेदपुर से मात्र 15-20 किलोमीटर दूर स्थित है, मुख्य रूप से हाथियों के संरक्षण के लिए जाना जाता है। यहां शुष्क मिश्रित पर्णपाती वन पाए जाते हैं और यह क्षेत्र ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल की सीमाओं से सटा हुआ है। इस खोज से दलमा की पर्यटन और शोध क्षमता में और इजाफा होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने इस खोज को झारखंड की प्राकृतिक संपदा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है और स्थानीय वन विभाग से इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
