- आगमन और स्वागत: सुबह 8:40 बजे प्रामदम हेलीपैड पर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने निलक्कल होते हुए पंबा पहुंचा। वहां उन्होंने गणपति मंदिर में इरुमुदी की तैयारी की। राज्य देवास्वोम मंत्री वी.एन. वासवान, पठानमथिट्टा सांसद एंटो एंटनी और ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (टीडीबी) अध्यक्ष पी.एस. प्रसांत ने उनका स्वागत किया। मंदिर तांत्री (मुख्य पुजारी) कंदारारु माहेश मोहनारु ने पूर्ण कुम्भ से स्वागत किया।
- दर्शन का समय: करीब 11:50 बजे सन्निधानम पहुंचकर उन्होंने आरती और पूजा की। दर्शन के बाद उन्होंने निकटवर्ती मलिकापुरम मंदिर का भी दौरा किया। सुरक्षा के चलते अन्य भक्तों का प्रवेश अस्थायी रूप से रोका गया था।
- विशेष घटना: हेलीकॉप्टर की थोड़ी तकनीकी खराबी के बावजूद राष्ट्रपति ने सड़क मार्ग से यात्रा जारी रखी, जो उनकी दृढ़ता का प्रतीक बनी।
बीजेपी सांसद बांदी संजय कुमार ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “राष्ट्रपति मुर्मू ने कोई नियम तोड़ा नहीं, किसी विश्वास को ठेस नहीं पहुंचाई—उन्होंने केवल सम्मान दिया। वे पहली राष्ट्रपति बनीं जिन्होंने इरुमुदी धारण कर भगवान अय्यप्पा को प्रणाम किया।” टीडीबी अधिकारियों ने इस दौरे को सुगम और आध्यात्मिक बताया।
- कार्यक्रम: उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति ने मठ में भोजन किया और स्थानीय समुदाय से संवाद किया। मठ प्रमुख स्वामी पुनार्वसु ने उनका स्वागत किया।
- महत्व: यह दौरा केरल की सामाजिक-धार्मिक परंपराओं को राष्ट्रीय पटल पर लाने वाला था। राष्ट्रपति मुर्मू की आदिवासी पृष्ठभूमि इस आयोजन को और प्रासंगिक बनाती है, क्योंकि गुरु ने भी वंचित वर्गों के उत्थान पर जोर दिया था।
राष्ट्रपति मुर्मू की चार दिवसीय यात्रा (21-24 अक्टूबर) धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और शैक्षिक उत्थान पर केंद्रित है। गुरुवार को वे राज भवन में पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन की प्रतिमा का अनावरण करेंगी, उसके बाद कोट्टायम के सेंट थॉमस कॉलेज के प्लेटिनम जयंती समारोह में भाग लेंगी। शुक्रवार को एर्नाकुलम के सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी समारोह में शिरकत करेंगी।इस यात्रा के दौरान राज्य पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की, जिसमें तिरुवनंतपुरम में पार्किंग प्रतिबंध और ट्रैफिक डायवर्जन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा केरल की विविधता को एकजुट करने वाला है, खासकर सबरीमाला जैसे विवादास्पद स्थलों पर।
