राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक सबरीमाला दर्शन: पहली महिला राष्ट्रपति बनीं मंदिर की भक्त, वर्कला शिवगिरि मठ में श्री नारायण गुरु महासमाधि शताब्दी का उद्घाटन

तिरुवनंतपुरम, 23 अक्टूबर 2025
भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को केरल के पवित्र सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना कर इतिहास रच दिया। वे मंदिर में दर्शन करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। चार दिवसीय केरल यात्रा के दूसरे दिन, राष्ट्रपति मुर्मू ने वर्कला स्थित प्रसिद्ध शिवगिरि मठ (श्री नारायण गुरु मठ) का दौरा किया, जहां उन्होंने सामाजिक सुधारक श्री नारायण गुरु की महासमाधि शताब्दी का उद्घाटन किया। यह यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक आयोजनों से भरपूर रही, जो राष्ट्रपति मुर्मू की समावेशी नेतृत्व शैली को दर्शाती है।
राष्ट्रपति मुर्मू की केरल यात्रा 21 अक्टूबर को तिरुवनंतपुरम पहुंचने के साथ शुरू हुई। मंगलवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उनका भव्य स्वागत किया। बुधवार को सुबह ही उन्होंने सबरीमाला के लिए प्रस्थान किया, जो यात्रा का प्रमुख आकर्षण था।
सबरीमाला में ऐतिहासिक दर्शन: परंपरा और आधुनिकता का संगम
सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर, जो भगवान अय्यप्पा को समर्पित है और ब्रह्मचर्य के प्रतीक के रूप में जाना जाता है, में राष्ट्रपति मुर्मू का दर्शन सुप्रीम कोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक फैसले के बाद एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। उस फैसले ने 10-50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को हटा दिया था, जिससे लंबे समय से चली आ रही बहस का अंत हुआ। राष्ट्रपति मुर्मू (67 वर्षीय) ने किसी परंपरा का उल्लंघन किए बिना इरुमुदी (पवित्र थैला) सिर पर धारण कर 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़ीं और मुख्य गर्भगृह में भगवान अय्यप्पा का दर्शन किया।
  • आगमन और स्वागत: सुबह 8:40 बजे प्रामदम हेलीपैड पर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने निलक्कल होते हुए पंबा पहुंचा। वहां उन्होंने गणपति मंदिर में इरुमुदी की तैयारी की। राज्य देवास्वोम मंत्री वी.एन. वासवान, पठानमथिट्टा सांसद एंटो एंटनी और ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (टीडीबी) अध्यक्ष पी.एस. प्रसांत ने उनका स्वागत किया। मंदिर तांत्री (मुख्य पुजारी) कंदारारु माहेश मोहनारु ने पूर्ण कुम्भ से स्वागत किया।
  • दर्शन का समय: करीब 11:50 बजे सन्निधानम पहुंचकर उन्होंने आरती और पूजा की। दर्शन के बाद उन्होंने निकटवर्ती मलिकापुरम मंदिर का भी दौरा किया। सुरक्षा के चलते अन्य भक्तों का प्रवेश अस्थायी रूप से रोका गया था।
  • विशेष घटना: हेलीकॉप्टर की थोड़ी तकनीकी खराबी के बावजूद राष्ट्रपति ने सड़क मार्ग से यात्रा जारी रखी, जो उनकी दृढ़ता का प्रतीक बनी।

बीजेपी सांसद बांदी संजय कुमार ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “राष्ट्रपति मुर्मू ने कोई नियम तोड़ा नहीं, किसी विश्वास को ठेस नहीं पहुंचाई—उन्होंने केवल सम्मान दिया। वे पहली राष्ट्रपति बनीं जिन्होंने इरुमुदी धारण कर भगवान अय्यप्पा को प्रणाम किया।” टीडीबी अधिकारियों ने इस दौरे को सुगम और आध्यात्मिक बताया।

वर्कला शिवगिरि मठ: सामाजिक सुधार की विरासत को नमन
केरल यात्रा के दूसरे दिन (बुधवार), राष्ट्रपति मुर्मू ने तिरुवनंतपुरम के राज भवन से वर्कला रवाना होकर शिवगिरि मठ पहुंचीं। यहां उन्होंने दोपहर 12:50 बजे श्री नारायण गुरु की महासमाधि शताब्दी (1928-2028) का उद्घाटन किया। श्री नारायण गुरु, केरल के प्रमुख सामाजिक सुधारक, ने जाति-भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाया और “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” का संदेश दिया। यह आयोजन मठ के 100 वर्षीय समारोह का हिस्सा था, जहां राष्ट्रपति ने गुरु की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, “श्री नारायण गुरु की विरासत समानता और एकता की मिसाल है, जो आज भी प्रासंगिक है।”

  • कार्यक्रम: उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति ने मठ में भोजन किया और स्थानीय समुदाय से संवाद किया। मठ प्रमुख स्वामी पुनार्वसु ने उनका स्वागत किया।
  • महत्व: यह दौरा केरल की सामाजिक-धार्मिक परंपराओं को राष्ट्रीय पटल पर लाने वाला था। राष्ट्रपति मुर्मू की आदिवासी पृष्ठभूमि इस आयोजन को और प्रासंगिक बनाती है, क्योंकि गुरु ने भी वंचित वर्गों के उत्थान पर जोर दिया था।

राष्ट्रपति मुर्मू की चार दिवसीय यात्रा (21-24 अक्टूबर) धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और शैक्षिक उत्थान पर केंद्रित है। गुरुवार को वे राज भवन में पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन की प्रतिमा का अनावरण करेंगी, उसके बाद कोट्टायम के सेंट थॉमस कॉलेज के प्लेटिनम जयंती समारोह में भाग लेंगी। शुक्रवार को एर्नाकुलम के सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी समारोह में शिरकत करेंगी।इस यात्रा के दौरान राज्य पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की, जिसमें तिरुवनंतपुरम में पार्किंग प्रतिबंध और ट्रैफिक डायवर्जन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा केरल की विविधता को एकजुट करने वाला है, खासकर सबरीमाला जैसे विवादास्पद स्थलों पर।

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