कबीरधाम(कवर्धा), 23 फरवरी 2026:
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में ‘घर वापसी’ या ‘हिंदू धर्म वापसी’ अभियान जोरों पर है। हाल ही में कुल्हीडोंगरी गांव में आयोजित ‘संस्कृति गौरव सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह’ के दौरान बैगा आदिवासी समुदाय के लगभग 140 से 165 पुरुषों और महिलाओं (कुछ रिपोर्ट्स में 165 सदस्यों का उल्लेख) ने अपने मूल सनातन धर्म और परंपराओं में वापसी की।
कार्यक्रम में विधायक भावना बोहरा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इन आदिवासियों के पैर धोए, उन्हें तिलक लगाया, माला पहनाई और गरिमापूर्वक स्वागत किया। यह आयोजन ग्राम कुल्हीडोंगरी की प्राथमिक शाला के पास हुआ, जहां आदिवासी परिवारों ने धर्मांतरण के प्रभाव से मुक्त होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने की इच्छा जताई। कई स्रोतों में इसे 140 बैगा आदिवासी परिवारों की वापसी के रूप में वर्णित किया गया है, जबकि अन्य में 165 व्यक्तियों का जिक्र है।
विधायक बोहरा ने कहा कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीन संस्कृति का संरक्षक है और कुछ मिशनरियों द्वारा प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के प्रयासों के खिलाफ यह जागरूकता अभियान चल रहा है। उन्होंने जोर दिया कि यह अभियान निरंतर चलेगा ताकि वनांचल क्षेत्र के लोग अपनी मूल परंपराओं और सनातन मूल्यों से जुड़े रहें।
अबतक 500 से अधिक का दावा
विधायक भावना बोहरा पिछले कुछ महीनों से इस मुहिम को लगातार चला रही हैं। विभिन्न कार्यक्रमों में:
- नेऊर, अमानिया, डमगढ़, कुई-कुकदुर आदि क्षेत्रों से पहले 115, 70, 66, 125 आदि संख्या में लोग लौट चुके हैं।
- हाल के कार्यक्रमों में फरवरी 2026 में दमगढ़ में 65-66, और अब कुल्हीडोंगरी में 140-165 की वापसी।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय स्रोतों के अनुसार, पंडरिया विधानसभा के वनांचल क्षेत्रों से अब तक 400 से 500 से अधिक आदिवासी नागरिकों ने सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ की है। कुछ रिपोर्ट्स में कुल संख्या 500 पार करने का दावा किया गया है, जबकि अन्य में 400+ का उल्लेख है। यह अभियान 2025 से सक्रिय रूप से चल रहा है, जहां पहले 70, 115, 125 आदि की घटनाएं दर्ज हैं।
यह पहल छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विरोधी चर्चा को तेज कर रही है, जहां आदिवासी समुदाय को उनकी प्राचीन प्रकृति-पूजा परंपराओं और हिंदू संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे विवादास्पद बताया है, लेकिन भाजपा इसे सांस्कृतिक संरक्षण और जागरूकता का अभियान बता रही है।
