लोकसभा में सिलेंडर संकट पर विपक्ष का जबरदस्त हंगामा: राहुल गांधी सहित सांसदों ने संसद परिसर में किया प्रदर्शन, ‘नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब’ के नारे लगाए

नई दिल्ली, 12 मार्च 2026

 

बजट सत्र के दौरान लोकसभा में गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने देशव्यापी एलपीजी सिलेंडर संकट के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण स्पीकर ओम बिरला को सदन दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा संकट गहराया है, लेकिन केंद्र सरकार एलपीजी (खासकर कमर्शियल सिलेंडर) की कमी और कीमतों में उछाल पर चुप्पी साधे हुए है। कांग्रेस सांसदों ने दावा किया कि घरेलू सिलेंडर की कीमतें दोगुनी हो गई हैं और कमर्शियल सिलेंडर की भारी किल्लत से होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं।

सदन में हंगामा और स्पीकर की वापसी

  • बुधवार को विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) वॉयस वोट से खारिज कर दिया गया था।
  • गुरुवार को स्पीकर बिरला दोबारा कुर्सी पर लौटे, लेकिन सदन शुरू होते ही विपक्ष ने सिलेंडर संकट को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
  • स्पीकर ने सांसदों से सदन चलाने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष नहीं माना, जिसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

 

संसद परिसर में प्रदर्शन

संसद परिसर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई सांसदों ने एलपीजी संकट पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्लेकार्ड और बैनर लिए हुए थे, जिन पर लिखा था: “नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब”। राहुल गांधी ने प्रदर्शन में शामिल होकर कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है और ऊर्जा सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है। विपक्ष ने मांग की कि इस मुद्दे पर तत्काल विस्तृत चर्चा हो और सरकार कमी दूर करने के ठोस कदम उठाए।

संकट की वजह और प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव) के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत में एलपीजी (विशेष रूप से कमर्शियल) की कमी और कीमतों में तेज उछाल आया है। कई राज्यों में होटल और रेस्तरां बंद होने की खबरें आई हैं, जबकि आम जनता पैनिक खरीदारी कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की विदेश नीति कमजोर होने से यह संकट बढ़ा है, जबकि सरकार इसे बाहरी कारकों से जोड़ रही है।

 

 

 

 

 

 

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