नई दिल्ली, 04 फरवरी 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार (4 फरवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के रूप में खुद पेश हुईं और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के खिलाफ अपनी दलीलें रखीं। सफेद साड़ी में काले शॉल (चादर/स्कार्फ) से लिपटीं ममता ने जब बहस की, तो लोगों को करीब 29 साल पुरानी घटना याद आ गई, जब उन्होंने वकील के रूप में काला गाउन पहनकर अदालत में पैरवी की थी।
यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री पहली बार सुप्रीम कोर्ट में खुद वकील बनकर दलीलें रख रही थीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की बेंच ने सुनवाई की। CJI ने ममता को 15 मिनट का समय दिया, जबकि उन्होंने शुरुआत में सिर्फ 5 मिनट मांगे थे।
ममता बनर्जी की प्रमुख दलीलें
ममता ने कोर्ट को बताया कि यह उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और लोगों की लड़ाई है। उन्होंने SIR प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए:
- SIR केवल नाम काटने (deletion) के लिए है, नए नाम जोड़ने (inclusion) के लिए नहीं।
- बंगाल को चुनावों से पहले विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असम जैसे अन्य राज्यों में ऐसा नहीं किया गया।
- जीवित लोगों को मृत घोषित किया जा रहा है; महिलाओं के शादी के बाद सरनेम बदलने, स्पेलिंग मिसमैच जैसी छोटी गलतियों पर नाम हटाए जा रहे हैं।
- चुनाव आयोग को “WhatsApp Commission” करार देते हुए कहा कि न्याय “बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है”।
- SIR के दबाव से 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें एक बूथ लेवल ऑफिसर भी शामिल है।
- 58 लाख नामों को “declared dead” मार्क किया गया; लाखों मामलों में सुनवाई लंबित है।
- उन्होंने कोर्ट से अपील की कि लोकतंत्र बचाएं और 2026 विधानसभा चुनाव पुरानी मतदाता सूची (2005 या मौजूदा) के आधार पर कराएं।
CJI सूर्यकांत ने कहा, “हर समस्या का समाधान है और हमें सुनिश्चित करना होगा कि कोई निर्दोष व्यक्ति बाहर न रहे।” बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी किया तथा अगली सुनवाई 9 फरवरी तय की।
29 साल पुरानी याद: वकील ममता का काला गाउन
ममता बनर्जी LLB डिग्री धारक हैं और 1990 के दशक में उन्होंने वकील के रूप में काला गाउन पहनकर अदालत में जिरह की थी। आज सफेद साड़ी और काले शॉल में उनकी उपस्थिति ने उस पुरानी छवि को ताजा कर दिया। अदालत परिसर में वकील और याचिकाकर्ता बड़ी संख्या में जमा हुए थे ताकि यह दुर्लभ दृश्य देख सकें।
SIR विवाद का पूरा
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR के तहत मतदाता सूची का विशेष संशोधन हो रहा है। TMC इसे राजनीतिक साजिश बता रही है और आरोप है कि लाखों नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि नए नाम नहीं जोड़े जा रहे। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि कोर्ट ने याचिका के दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया। यह मामला 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से सीधे जुड़ा है, जहां मतदाता अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस विवाद को निर्णायक मोड़ दे सकता है।
