झारखंड हाईकोर्ट से सीएम हेमंत सोरेन को बड़ा झटका: MP/MLA केस 2/2024 रद्द करने की याचिका खारिज, ED समन अवहेलना मामले में व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य

रांची, 15 जनवरी 2026

 

झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका देते हुए MP/MLA केस संख्या 2/2024 को रद्द करने या निरस्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज समन की अवहेलना से जुड़ा है, जिसमें ED ने आरोप लगाया था कि सीएम ने जमीन घोटाले की जांच के सिलसिले में जारी समन पर पेश नहीं हुए।

हाईकोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामला गंभीर है और अदालती प्रक्रिया में सहयोग आवश्यक है। कोर्ट ने MP/MLA स्पेशल कोर्ट में मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति को अनिवार्य माना है, हालांकि कुछ सुनवाइयों में वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर शारीरिक या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना होगा।

क्या है पूरा मामला

  • ED ने हेमंत सोरेन के खिलाफ जमीन घोटाले (अवैध भूमि हस्तांतरण और मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच के दौरान कई समन जारी किए थे।
  • सीएम द्वारा समन की अनदेखी पर ED ने धारा 174 IPC के तहत शिकायत दर्ज की, जो MP/MLA स्पेशल कोर्ट में कांड संख्या 2/2024 के रूप में लंबित है।
  • निचली अदालत ने व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
  • पहले हाईकोर्ट ने दिसंबर 2024 में अंतरिम राहत दी थी, जिसमें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिली थी, लेकिन बाद में नवंबर 2025 में इस अंतरिम आदेश को वापस ले लिया गया था।
  • अब याचिका पूरी तरह खारिज होने से सीएम को MP/MLA कोर्ट में पेश होना पड़ेगा, जहां मामले की आगे सुनवाई होगी।

कोर्ट की टिप्पणियां और आदेश

  • कोर्ट ने कहा कि अपराध छोटा होने के बावजूद (धारा 174 IPC), अदालती प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
  • मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए कुछ छूट संभव, लेकिन जांच में बाधा नहीं डाली जा सकती।
  • ED की शिकायत पर आगे की कार्रवाई MP/MLA कोर्ट द्वारा की जाएगी।

JMM और कांग्रेस ने इस फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकि ED का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है और कानून सबके लिए बराबर है। यह मामला झारखंड में केंद्र-राज्य संबंधों और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर नए सिरे से बहस छेड़ सकता है। अगली सुनवाई की तारीख MP/MLA कोर्ट द्वारा तय की जाएगी, जहां मुख्यमंत्री या उनके वकील को पेश होना होगा।

 

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