तेहरान, 14 जनवरी 2026
ईरान में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों का आज 18वां दिन है। ये प्रदर्शन पिछले महीने मुद्रा के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने से शुरू हुए थे, जो जल्द ही पूरे देश में सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। इस बीच, 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को आज फांसी दिए जाने की आशंका जताई जा रही है। सुलतानी को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और विश्व नेताओं ने इस पर गंभीर चिंता जताई है, जबकि ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को ‘हत्यारे’ करार दिया है।
प्रदर्शनों का बैकग्राउंड और फैलाव
ये विरोध प्रदर्शन 27 दिसंबर 2025 को ईरानी रियाल के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से शुरू हुए। शुरुआत में आर्थिक असंतोष से जुड़े ये प्रदर्शन जल्द ही राजनीतिक मांगों में बदल गए, जिसमें सरकार के इस्तीफे, महिलाओं के अधिकारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाजें शामिल हैं। प्रदर्शन पूरे देश में फैल चुके हैं, जिसमें तेहरान, इस्फहान, मशहद और अन्य प्रांत शामिल हैं। सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है, जिससे सूचनाओं का प्रवाह रुक गया है। फिर भी, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से रिपोर्ट्स आ रही हैं कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की है, जिसमें गोलीबारी, गिरफ्तारियां और यातनाएं शामिल हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, एक अस्पताल में ही सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को आंखों में गोली लगने की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।

इरफान सुलतानी का मामला: फांसी की तलवार
26 वर्षीय इरफान सुलतानी को प्रदर्शन में हिस्सा लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें तेजी से ट्रायल के बाद मौत की सजा सुनाई गई। मानवाधिकार संगठनों ने इसे ‘अनुचित और राजनीति से प्रेरित’ करार दिया है। यदि फांसी दी जाती है, तो यह प्रदर्शनों के दौरान पहली सार्वजनिक फांसी होगी, जो सरकार की सख्ती को दर्शाती है।

सुलतानी के परिवार और समर्थकों ने अंतरराष्ट्रीय अपील की है कि फांसी रोकी जाए।मौतों और फांसी की सजा का आंकड़ासीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 2400 से अधिक हो चुकी है। अन्य स्रोतों में यह संख्या 2000 से ऊपर बताई जा रही है। द गार्डियन के अनुसार, ईरान चीन के बाद दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाला देश है। नॉर्वे स्थित ईरान मानवाधिकार समूह ने बताया कि 2025 में ईरान में कम से कम 1500 लोगों को फांसी दी गई।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रम्प ने कहा, “यह हिंसा का चक्र रुकना चाहिए। ईरानी लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।” संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने भी ईरान से हिंसा रोकने और राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग की है। ईरानी सांस्कृतिक हस्तियां और एक्टिविस्ट्स ने ब्लैकआउट की निंदा की है। मानवाधिकार उल्लंघन और चुनौतियांमानवाधिकार संगठनों ने ईरान में मनमानी गिरफ्तारियां, फांसी और हिंसा की निंदा की है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने हाई-टेक तरीकों से प्रदर्शन दबाने की कोशिश की है, जिसमें ड्रोन और सर्विलांस शामिल हैं।

ये प्रदर्शन ईरान के इतिहास में सबसे हिंसक माने जा रहे हैं, जो 2019 और 2022 के आंदोलनों से भी बड़े हैं। प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है, लेकिन सरकार की सख्ती से स्थिति और बिगड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है, लेकिन ईरान ने इन आरोपों को ‘पश्चिमी प्रोपेगैंडा’ करार दिया है।
दुनिया की नजरें अब इरफान सुलतानी के मामले पर टिकी हैं, जो प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रतीक बन सकता है।
