नई दिल्ली, 23 फवरी 2026
भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 सीजन में भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन (लगभग 15.018 करोड़ टन) पहुंच गया, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन रहा। यह उपलब्धि भारतीय किसानों की मेहनत, उच्च उपज वाली नई बीज किस्मों और सरकारी नीतियों का नतीजा है।
इसके साथ ही भारत अब न केवल घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर चावल की आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रहा है। देश पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, जहां 2024-25 में 20 मिलियन टन से अधिक चावल का निर्यात हुआ। एक नई उपलब्धि यह है कि अब भारतीय कृषि उत्पाद, विशेष रूप से प्रीमियम और पेरिशेबल आइटम्स (जैसे फल, सब्जियां, GI-टैग्ड उत्पाद और कुछ विशेष चावल किस्में), हवाई मार्ग से तेजी से विदेश पहुंच रहे हैं। एयर इंडिया कार्गो और अन्य एयरलाइंस के माध्यम से तापमान नियंत्रित सुविधाओं के साथ ये उत्पाद मालदीव, अमेरिका, यूरोप और अन्य बाजारों में ताजा पहुंचाए जा रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक के नंजनगुड रसबाले केला, मैसूर बेटल लीव्स और इंडी लाइम जैसे GI-टैग्ड उत्पादों की पहली बार हवाई शिपमेंट मालदीव पहुंची, जो APEDA के प्रयासों का नतीजा है।
यह विकास भारतीय कृषि को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत बना रहा है, जहां समुद्री मार्ग के साथ-साथ एयर कार्गो से उच्च मूल्य वाले और जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की मांग पूरी हो रही है। इससे किसानों की आय बढ़ रही है और भारत ‘अन्नदाता’ से ‘विश्व खाद्य प्रदाता’ की भूमिका में मजबूती से उभर रहा है।
