हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ का बड़ा ऐलान: 182 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर से मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगी

कोलकाता, 18 मार्च 2026

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया तूफान मचाने वाले टीएमसी के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने बुधवार को अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP)’ के 15 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। उन्होंने बड़ा दावा किया कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारेगी।

कबीर ने स्पष्ट किया कि भवानीपुर से उनकी पार्टी की उम्मीदवार पूनम बेगम होंगी, जो एक गैर-बंगाली मुस्लिम महिला हैं। यह फैसला मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी करने की उनकी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भवानीपुर सीट पर पहले से ही कड़ा मुकाबला है, जहां ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ती हैं। कबीर का दावा है कि उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय के बीच मजबूत आधार बनाकर टीएमसी को बड़ा नुकसान पहुंचाएगी।

पार्टी द्वारा जारी पहली लिस्ट में अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में पूर्वी बर्दवान के पूर्वस्थली उत्तर से बापन घोष, कांडी से कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व दामाद यासीन हैदर, और बेलडांगा से सैयद अहमद कबीर शामिल हैं। सूची में मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों के उम्मीदवारों पर फोकस है, जबकि बाकी उम्मीदवारों की घोषणा 22 मार्च तक होने की उम्मीद है।

हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से TMC विधायक थे। दिसंबर 2025 में उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद का शिलान्यास करने की घोषणा की थी, जिसके बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। इस विवाद के बाद उन्होंने दिसंबर 2025 में जनता उन्नयन पार्टी (बाद में नाम बदलकर आम जनता उन्नयन पार्टी) की स्थापना की। पार्टी को चुनाव आयोग से मार्च 2026 में प्रारंभिक मान्यता मिली।

कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी टीएमसी और भाजपा दोनों के खिलाफ लड़ रही है और मुस्लिम समुदाय सहित आम जनता के हितों के लिए काम करेगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी हंग असेंबली की स्थिति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है।

यह घोषणा 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले सियासी समीकरणों को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है, खासकर मुस्लिम बहुल जिलों में जहां टीएमसी का मजबूत आधार है। प्रशासन और राजनीतिक विश्लेषक इस नए दल के प्रभाव पर नजर रखे हुए हैं।

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