पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू किसान कैलाश कोल्ही की गोली मारकर हत्या, बदीन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

बदीन (सिंध), 10 जनवरी 2026

 

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले में एक मामूली विवाद को लेकर 25 वर्षीय हिंदू किसान और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश कोल्ही (Kailash Kolhi) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना 4 जनवरी 2026 को तल्हार के पास राहो कोल्ही गांव में हुई, जहां प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी (Sarfaraz Nizamani) ने कथित तौर पर कैलाश पर दो गोलियां दागीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। विवाद कृषि भूमि पर कैलाश द्वारा अपनी परिवार के लिए एक छोटी झोपड़ी (hut/shelter) बनाने को लेकर हुआ था।

हत्या के बाद भारी आक्रोश

घटना के बाद हिंदू समुदाय और अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों में भारी रोष फैल गया। कैलाश की पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता सहित हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बदीन-हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (Badin-Hyderabad National Highway) और बदीन-थार कोल रोड (Badin-Thar Coal Road) पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे इन प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

प्रदर्शन कई दिनों से जारी है (कुछ रिपोर्ट्स में चौथे दिन तक का जिक्र), जिसमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, जिसमें “जस्टिस फॉर कैलाश कोल्ही” और “जय श्री राम” जैसे नारे भी गूंजे।

प्रमुख मांगें

  • प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी की तुरंत गिरफ्तारी।
  • हत्या के मामले में मर्डर और आतंकवाद के तहत केस दर्ज करना।
  • पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करना।
  • सिंध में अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) के खिलाफ बढ़ती हिंसा, अपहरण और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाना।

प्रमुख हिंदू अधिकार कार्यकर्ता शिवा काच्छी (Shiva Kachhi), जो पाकिस्तान दारावर इत्तेहाद (Pakistan Darawar Ittehad) के चेयरमैन हैं, ने इस हत्या को “अल्पसंख्यकों पर हमला” करार दिया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि “कैलाश कोल्ही का खून न्याय मांग रहा है” और प्रदर्शन में पूरी ताकत से भागीदारी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सिंध, जो कभी प्रेम और सहिष्णुता का प्रतीक था, अब डर और उत्पीड़न से ग्रस्त है।

राजनीतिक और सामाजिक समर्थन

प्रदर्शन में दर्जनों राजनीतिक, राष्ट्रवादी और धार्मिक संगठन शामिल हुए, जिनमें जमीअत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI), पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), जिए सिंध महाज, कौमी अवामी तहरीक आदि शामिल हैं। सिंध ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी मामले का संज्ञान लिया है।पुलिस ने शुरुआत में गिरफ्तारी का वादा किया था, लेकिन देरी के कारण प्रदर्शन और तेज हो गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कमिश्नर ऑफिस के बाहर भी धरना दिया और पुलिस ने आश्वासन दिया कि 7 दिनों के अंदर आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।

व्यापक संदर्भ

यह घटना पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का एक और उदाहरण है, जहां जमींदारों की ताकत, पुलिस की निष्क्रियता और न्याय में देरी आम शिकायतें हैं। कार्यकर्ता इसे “सिस्टेमिक फेलियर” बता रहे हैं, जहां गरीब और अल्पसंख्यक किसानों (हरि) को बार-बार निशाना बनाया जाता है। प्रदर्शन अभी भी जारी है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी इस पर नजर बनाए हुए हैं।

 

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