नई दिल्ली, 09 फरवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट आज (9 फरवरी 2026) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को चुनौती दी गई है। यह सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन जजों की बेंच कर रही है।
बेंच आज चुनाव आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जवाब सुन रही है। ममता बनर्जी की याचिका के साथ ही कई अन्य संबंधित याचिकाएं भी साथ में सुनी जा रही हैं। पिछली सुनवाई (4 फरवरी 2026) में ममता बनर्जी ने खुद अदालत में पेश होकर दलीलें दी थीं और SIR को “लोगों को बुलडोजर करने” वाला अभियान करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया विपक्षी शासित राज्यों को निशाना बना रही है और लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।
मुख्य बिंदु और आज की सुनवाई में क्या हो रहा है:
- ममता बनर्जी के वकील श्याम दीवान ने दावा किया कि 70 लाख लोगों को “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” श्रेणी में नोटिस मिले हैं, जिसका मतलब बड़े पैमाने पर बहिष्कार (mass exclusion) लगता है।
- CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग संविधान के तहत “हर वैध नागरिक” को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए बाध्य है और SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा नहीं बर्दाश्त की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह सभी राज्यों को समझना होगा कि SIR में कोई रुकावट नहीं होगी।”
- पश्चिम बंगाल सरकार ने SIR के लिए 8,505 ग्रुप B अधिकारियों को उपलब्ध कराने की पेशकश की है, लेकिन राज्य पर देरी का आरोप लगा है।
- चुनाव आयोग का पक्ष है कि असंगतियां सिर्फ “हिम्स ऑफ द आइसबर्ग” हैं और प्रक्रिया निष्पक्ष है।
यह मामला पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों (2026) से जुड़ा है, जहां मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन फरवरी के मध्य तक होना है। ममता बनर्जी ने मांग की है कि 2025 की मौजूदा सूची पर ही चुनाव हों और आधार को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
सुनवाई में एक याचिका भी आई है, जिसमें ममता बनर्जी के व्यक्तिगत रूप से पेश होने को “संवैधानिक रूप से अनुचित” बताया गया है। अदालत आगे क्या फैसला सुनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ सकता है।
