नई दिल्ली/लखनऊ, 27 जनवरी 2026
UGC के नए इक्विटी नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी और सवर्ण समुदाय के छात्रों-युवाओं का विरोध पूरे देश में फैल गया है। UGC मुख्यालय, नई दिल्ली के बाहर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की आशंका के चलते सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने कैंपस के प्रवेश द्वारों पर भारी संख्या में बैरिकेड्स लगाए हैं और प्रदर्शनकारियों को अंदर जाने से रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
ये नियम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” के नाम से जाने जाते हैं, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए हैं। इनके तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्विटी कमिटी, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर, 24×7 हेल्पलाइन, मॉनिटरिंग स्क्वॉड और इक्विटी एम्बेसडर नियुक्त करने अनिवार्य हैं। शिकायतों का समयबद्ध निपटारा और SC/ST/OBC छात्रों की विशेष सुरक्षा पर जोर है। UGC के अनुसार, 2019-20 से 2023-24 के बीच जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतें 118.4% बढ़ी हैं (173 से 378 तक)।
हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों का आरोप है कि ये नियम एकतरफा हैं। इनमें झूठी शिकायतों के लिए कोई सजा का प्रावधान नहीं है, जिससे दुरुपयोग का खतरा है। विरोधियों का कहना है कि नियम जनरल कैटेगरी छात्रों को डिफॉल्ट रूप से दोषी मानते हैं, जबकि उनके लिए कोई समान सुरक्षा या शिकायत तंत्र नहीं है। इक्विटी कमिटी में SC/ST/OBC/महिलाओं/दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, लेकिन जनरल कैटेगरी का कोई कोटा नहीं, जिससे पक्षपात की आशंका जताई जा रही है।
सवर्ण छात्रों का प्रदर्शन, रायबरेली में चूड़ियां भेजीं सांसदों को
- नई दिल्ली: UGC मुख्यालय के बाहर “सवर्ण सेना” और अन्य छात्र संगठनों ने प्रदर्शन की योजना बनाई। बैरिकेड्स और पुलिस बल से शहर में तनाव।
- उत्तर प्रदेश: लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों ने बड़े पैमाने पर रैलियां और धरने दिए। लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों ने विरोध जताया।
- रायबरेली: भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेजीं, ताकि वे “मर्दानगी दिखाते हुए” इन नियमों के खिलाफ आवाज उठाएं। यह कदम सवर्ण समुदाय में गुस्से का प्रतीक बन गया।
- अन्य राज्यों में भी पटना, रांची, पंजाब आदि में छात्र चौपाल और प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर BJP कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे दिए।
विरोधियों ने #UGCRollback, #ShameOnUGC जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए। कुछ संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल करने की बात कही है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नियम निष्पक्ष होंगे और छात्रों की चिंताओं पर विचार किया जाएगा।
यह विवाद उच्च शिक्षा में समावेशिता vs समानता के बीच संतुलन की बहस को तेज कर रहा है। UGC का कहना है कि नियम 2012 के पुराने नियमों को अपडेट करते हैं, लेकिन आलोचक इसे “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” बता रहे हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और बड़े आंदोलन की आशंका है।
