कोलकाता, 23 फरवरी 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति के जाने-माने रणनीतिकार और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। 71 वर्षीय रॉय ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में रात करीब 1:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इसकी पुष्टि की है। रॉय लंबे समय से कई बीमारियों (जैसे डिमेंशिया, पार्किंसंस और डायबिटीज) से जूझ रहे थे और पिछले कुछ दिनों से कोमा में थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और झाऱखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
राजनीतिक यात्रा का सफर
मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से बीएससी और मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री हासिल की। राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की, जहां वे ममता बनर्जी के करीबी बने। 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना की, तो रॉय इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। वे TMC के पहले राष्ट्रीय महासचिव बने और पार्टी के संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाई।
2011 में TMC की जीत और वाम मोर्चा के 34 साल के शासन के अंत में रॉय की रणनीतिक भूमिका को ‘बंगाल का चाणक्य’ कहा जाने लगा। UPA-2 सरकार में वे पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री और फिर 2012 में रेल मंत्री बने (मार्च से सितंबर तक)। रेल बजट में किराया वृद्धि विवाद के बाद उन्होंने किराए वापस करने का फैसला लिया, जो यादगार रहा। वे दो बार राज्यसभा सदस्य भी चुने गए।
विवादों और दलबदली का दौर
रॉय का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा। 2015 में TMC से उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया गया। 2017 में शारदा चिटफंड घोटाले और नारदा स्टिंग ऑपरेशन में नाम आने के बाद TMC से निलंबित होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। नवंबर 2017 में वे भाजपा में शामिल हो गए, जहां उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। भाजपा में वे बंगाल में पार्टी के विस्तार के प्रमुख रणनीतिकार बने।
2021 विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा के टिकट पर जीते, लेकिन चुनाव नतीजों के 9 दिन बाद ही 11 जून 2021 को बेटे सुभ्रांशु के साथ TMC में वापस लौट आए। यह दलबदल दल-बदल कानून के तहत विवादास्पद रहा। 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहराया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया। हाल के वर्षों में स्वास्थ्य खराब होने से उनकी सक्रिय राजनीति सीमित हो गई थी।
मुकुल रॉय की मौत से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। वे TMC की स्थापना से लेकर BJP के विस्तार तक की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के गवाह और कर्ताधर्ता रहे। उनके निधन पर ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य नेताओं ने गहरा शोक जताया है।
