चाईबासा, 28 अक्टूबर 2025
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में तांबो चौक पर मंगलवार को हुई हिंसक झड़प ने पूरे कोलहान क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों के धरनार्थियों और पुलिस के बीच पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से स्थिति बेकाबू हो गई। कई लोग घायल होने की खबर है, जबकि सड़कों पर आग और धुआं फैल गया। इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने बुधवार, 29 अक्टूबर को कोलहान बंद का आह्वान किया है। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही और जनता की आवाज दबाने की कोशिशों को हालात बिगड़ने का मुख्य कारण बताया।
चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा, “प्रशासन की उदासीनता और दमनकारी नीतियों ने चाईबासा की शांत सड़कों को आग का गोला बना दिया। आदिवासी भाइयों-बहनों की मांग जायज है, लेकिन सरकार उन्हें कुचलना चाहती है। कोलहान बंद के जरिए हम इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होंगे।” भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार शाम को चाईबासा में ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया, जो घटना के बाद राज्य स्तर पर सियासत को और भड़काने वाला कदम माना जा रहा है।हिंसक झड़प की पूरी कथा: नो-एंट्री आंदोलन से बवालचाईबासा के तांबो चौक पर ‘नो-एंट्री’ आंदोलन लंबे समय से चल रहा था। स्थानीय आदिवासी संगठनों का दावा है कि भारी वाहनों के अत्यधिक आवागमन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। मंगलवार दोपहर को धरना स्थल पर सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा हुए, लेकिन जब पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो हालात बिगड़ गए।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) चाईबासा ने बताया, “स्थिति नियंत्रण में है। अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। हम शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं।” हालांकि, आदिवासी संगठनों ने इसे “राज्य प्रायोजित दमन” करार दिया है।कोलहान बंद: क्या रहेगा प्रभाव?चंपाई सोरेन के आह्वान पर बुधवार को कोलहान प्रमंडल (जिसमें चाईबासा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिले शामिल हैं) में 12 घंटे का बंद रखा जाएगा। बंद समर्थक दुकानें, बाजार और परिवहन सेवाएं ठप रखने की अपील कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने बुधवार के बंद के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। एसएसपी चाईबासा ने कहा, “हम संवाद के जरिए मुद्दा सुलझाने की कोशिश करेंगे।” आदिवासी संगठनों ने भी बंद के बाद वार्ता की पेशकश की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने चाईबासा में ‘नो एंट्री’ लागू करने की मांग को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भाई-बहन केवल यह मांग कर रहे थे कि भारी वाहनों की नो एंट्री लागू की जाए, ताकि अवैध बालू और लौह अयस्क ढोने वाले किलर ट्रक उनके गांवों से होकर न गुजरें। इन ट्रकों ने बीते एक साल में 100 से अधिक निर्दोष लोगों की जान ले ली है, फिर भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
