किसानों और आदिवासियों का ‘रेड स्टॉर्म’ मार्च: नासिक से मुंबई तक लंबा पैदल प्रदर्शन, वन भूमि अधिकार, कर्ज माफी और MSP की मांगें जोरदार

नासिक, 25 जनवरी 2026

 

महाराष्ट्र में किसानों और आदिवासियों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सड़कों पर उतर आए। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के नेतृत्व में 20,000 से अधिक किसान, आदिवासी और मजदूरों ने ‘रेड स्टॉर्म’ (लाल तूफान) नामक भव्य पैदल मार्च शुरू किया है, जो नासिक से मुंबई की ओर बढ़ रहा है।

यह मार्च विभिन्न मांगों को लेकर निकाला गया है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत वन भूमि पर स्वामित्व के पट्टे तुरंत जारी करना
  • आदिवासी क्षेत्रों में PESA कानून का प्रभावी क्रियान्वयन
  • किसानों का पूर्ण कर्ज माफी
  • फसलों के लिए गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), विशेषकर प्याज और अन्य नकदी फसलों के लिए
  • बिजली बिल माफी और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
  • आदिवासी इलाकों से वर्षा जल का सूखाग्रस्त क्षेत्रों में डायवर्जन

शनिवार को जिले के विभिन्न हिस्सों से जुटे प्रदर्शनकारी रात दिंडोरी रोड पर महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पास खुले मैदान में गुजारी। रविवार सुबह लाल झंडे लहराते हुए, जोरदार नारे लगाते और अनुशासित तरीके से मार्च शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों के बीच सबसे लोकप्रिय नारा था: “कौन कहता है कि वे नहीं देंगे? जब तक हमें यह नहीं मिल जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे!”

यह मार्च हाल ही में पालघर जिले में हुए सफल लॉन्ग मार्च (जिसमें 40,000-50,000 लोग शामिल थे) के बाद निकाला गया है, जो आदिवासी किसानों की एकजुटता और संगठित संघर्ष को दर्शाता है। आयोजकों का कहना है कि मार्च मुंबई पहुंचकर विधान भवन या राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना भी दिया जाएगा।

मार्च में शामिल आदिवासी किसानों ने बताया कि वर्षों से वन भूमि पर कब्जे के बावजूद पट्टे नहीं मिल रहे, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। साथ ही, बढ़ते कर्ज और फसलों के नुकसान ने उनकी स्थिति और बदतर कर दी है। यह ‘रेड स्टॉर्म’ मार्च महाराष्ट्र में किसान-आदिवासी आंदोलन की नई लहर का संकेत है, जो सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का संकल्प स्पष्ट है – मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *