संताली साहित्य के स्तंभ भैया हांसदा ‘चासा’ का निधन, गोटा भारोत सिदो कान्हु हूल बैसी ने दी श्रद्धांजलि, संताली साहित्य जगत में शोक

दुमका, 27 फरवरी 2026 

 

संताली साहित्य के प्रसिद्ध कवि, लेखक और साहित्यकार भैया हांसदा ‘चासा’ का निधन हो गया है। उनके निधन से संताली भाषा और साहित्य जगत में गहरा शोक छा गया है। वे लगभग 84 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। इलाज के दौरान पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर के एक अस्पताल में उनका देहांत हुआ।

भैया हांसदा ‘चासा’ का जन्म 28 फरवरी 1942 को गोड्डा जिले के राजाभिटा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम कुंवर हांसदा और माता का नाम दुल्हिन था। मैट्रिक उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने दुमका के किसान विद्यापीठ से डिप्लोमा प्राप्त किया और तत्कालीन बिहार सरकार के कृषि विभाग में जनसेवक के पद पर कार्य किया।

संताली साहित्य में गीत, कविता, कहानी और नाटक सभी विधाओं में उनकी महारत थी। उनकी प्रमुख रचनाओं में चासा सादेश, होडाक् बापला, पारसी आरसी, हँसवाणी (हिंदी कविता संग्रह) और पील सागर शामिल हैं। वे ‘हूल संवाद’ पत्रिका के प्रथम संपादक रहे और गोटा भारोत सिदो कान्हु हूल बैसी से जीवनभर गहराई से जुड़े रहे। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें ‘हूल सोम्बाद सिरोपा’ जैसे सम्मान से नवाजा गया था।

आज दुमका में गोटा भारोत सिदो कान्हु हूल बैसी के वरीय सदस्यों ने उनके आवास पर जाकर परिवार को ढांढस बंधाया। इसके बाद बांसकलानी स्थित कला-सांस्कृतिक प्रशिक्षण केंद्र में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैसी के वरीय सदस्य श्री विजय टुडू ने कहा कि “चासा” बैसी से अत्यंत निकट थे और अपनी लेखनी से संगठन को मजबूत बनाते रहे।

इंग्लैंड से आए डॉ. धुनी सोरेन सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शोक सभा में भाग लिया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की और शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

भैया हांसदा ‘चासा’ के निधन से संताली साहित्य को अपूरणीय क्षति पहुंची है। वे संताली भाषा के संरक्षण और समृद्धि के लिए समर्पित रहे।

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