बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन का ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ जारी, हर घर में एक सरकारी नौकरी का बड़ा वादा

पटना, 28 अक्टूबर 2025

 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बजते ही महागठबंधन ने मंगलवार को अपना साझा चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया। इसका नाम रखा गया ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने पटना के होटल मौर्या में आयोजित एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घोषणा पत्र को जारी किया। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा, भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी समेत महागठबंधन के अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे।

घोषणा पत्र को तेजस्वी यादव का ‘प्रण पत्र’ बताते हुए महागठबंधन ने इसे बिहार को देश का नंबर वन राज्य बनाने का विजन डॉक्यूमेंट करार दिया। तेजस्वी ने कहा, “यह संकल्प पत्र हमारे दलों और दिलों का प्रण है। हम बिहार को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पिछड़ेपन की जंजीरों से मुक्त करेंगे। बजट की चिंता मत कीजिए, हर परिवार में नौकरी देंगे।” उन्होंने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार को ठगा है, जहां सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत के काम नहीं होता।

हर घर में एक सरकारी नौकरी: सबसे बड़ा वादा

घोषणा पत्र का सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी वादा है – हर परिवार में एक सदस्य को सरकारी नौकरी। तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि सरकार बनने के 20 दिनों के अंदर इसके लिए एक कानून पारित किया जाएगा और 20 महीनों के भीतर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उनका दावा है कि जिन परिवारों में पहले से कोई सरकारी नौकरी नहीं है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। यह वादा बिहार के युवाओं को लुभाने का प्रमुख प्रयास माना जा रहा है, जहां बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।तेजस्वी ने कहा, “बेरोजगारी हमारी राजनीति का सबसे बड़ा संकल्प है। हम नौकरी का नवजागरण लाएंगे।” इस वादे को पूरा करने के लिए घोषणा पत्र में कौशल विकास केंद्र, स्टार्टअप फंड और आईटी पार्क जैसे कदमों का जिक्र है। इसके अलावा, बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये का भत्ता देने का भी ऐलान किया गया।

महिलाओं और जीविका दीदियों पर विशेष फोकस

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ‘माई-बहिन योजना’ और ‘बेटी-माई योजना’ को प्रमुखता दी गई है। इसके तहत हर महिला को मासिक 2,500 रुपये की सहायता दी जाएगी। जीविका दीदियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर उनका वेतन 10,000 से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाएगा। कर्ज पर ब्याज माफ करने और अतिरिक्त कार्य के लिए 2,000 रुपये भत्ता देने का वादा भी शामिल है। शिक्षा में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव है।अन्य प्रमुख वादे: किसान, गरीब और विकास पर जोरघोषणा पत्र में कुल 20 प्रण शामिल हैं, जो समाज के हर वर्ग को लक्षित करते हैं।

कुछ प्रमुख वादे इस प्रकार हैं:

श्रेणी प्रमुख वादे
रोजगार और युवा – हर परिवार में एक सरकारी नौकरी (20 महीने में) – बेरोजगारों को 1,500 रुपये मासिक भत्ता – 5 नए एक्सप्रेस-वे का निर्माण
महिलाएं – माई-बहिन योजना: 2,500 रुपये मासिक – जीविका दीदियों को 30,000 रुपये वेतन – बेटी-माई योजना
किसान और भूमि – भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन – किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी – डेयरी-बेस्ड इंडस्ट्री को बढ़ावा
स्वास्थ्य और शिक्षा – हर व्यक्ति को 25 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा – जिला अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं – पुरानी पेंशन योजना बहाल
बिजली और ऊर्जा – 200 यूनिट मुफ्त बिजली – ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स
दिव्यांग और वृद्ध – दिव्यांगों को 3,000 रुपये मासिक पेंशन – वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि
अन्य – संविदा कर्मचारियों को स्थायी करना – वक्फ संशोधन कानून को रद्द करना – बौद्ध मंदिरों का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपना – पंचायत प्रतिनिधियों का भत्ता दोगुना और पूर्व प्रतिनिधियों को पेंशन

मुकेश सहनी ने कहा, “यह संकल्प पत्र एक नए बिहार की नींव रखेगा।” दीपांकर भट्टाचार्य ने जोर दिया कि इसमें हर तबके की जरूरतें शामिल हैं, जबकि पवन खेड़ा ने इसे सामाजिक न्याय का दस्तावेज बताया।

एनडीए पर हमला, चुनावी रणनीति

महागठबंधन ने घोषणा पत्र के जरिए एनडीए पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और विकास की विफलता का आरोप लगाया। तेजस्वी ने कहा, “एनडीए अपना सीएम चेहरा घोषित करे, लेकिन बिहार बदलाव के मूड में है।” यह घोषणा पत्र युवा, महिला और गरीब वोटरों पर केंद्रित है, जो बिहार की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर चुनाव दो चरणों में होगा – पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को। नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल (सीपीआई, सीपीआई-एमएल, सीपीआई-एम) और वीआईपी शामिल हैं। 2020 में महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं, लेकिन सत्ता से बाहर रहने के बाद अब तेजस्वी की अगुवाई में वापसी की कोशिश है।

 

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