नई दिल्ली/कोलकाता, 16 फरवरी 2026
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया में गंभीर कदाचार, कर्तव्य की अनदेखी और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप में सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
ये सभी अधिकारी सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (Assistant Electoral Registration Officers – AEROs) के रूप में कार्यरत थे और राज्य सरकार के कर्मचारी होने के बावजूद चुनाव आयोग के अधीन ड्यूटी पर थे। निलंबन RP Act 1950 की धारा 13CC के तहत किया गया है।
निलंबित अधिकारियों के नाम और संबंधित विधानसभा क्षेत्र:
- डॉ. सेफाउर रहमान (समसेरगंज, मुर्शिदाबाद)
- नितीश दास (फरक्का, मुर्शिदाबाद)
- डालिया रे चौधरी (मयनागुड़ी, जलपाईगुड़ी)
- मुर्शिद आलम (सुति, मुर्शिदाबाद)
- सत्यजीत दास और जॉयदीप कुंडू (कैनिंग पूर्व, दक्षिण 24 परगना)
- देबाशीष बिस्वास (देबरा, पश्चिम मेदिनीपुर)
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिए हैं कि इन अधिकारियों के खिलाफ उनके कैडर नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए, बिना किसी देरी के। आयोग को इसकी जानकारी भी दी जाए।
पृष्ठभूमि:
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया नवंबर 2025 से चल रही है, जिसमें मतदाता सूची का गहन सत्यापन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। चुनाव आयोग ने बार-बार कहा है कि मतदाता सूची का कार्य पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता से होना चाहिए, और किसी भी लापरवाही या दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।यह कार्रवाई SIR के दौरान सामने आए गंभीर आरोपों के बाद ली गई है, जिसमें कुछ अधिकारियों पर प्रक्रिया को प्रभावित करने या नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगे थे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में भविष्य में भी कोई ढील नहीं बरती जाएगी, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।
