चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप: SIR प्रक्रिया में बाधा और हिंसा का माहौल बनाने का दावा

नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026

 

विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने एक विस्तृत एफिडेविट दाखिल किया है। इस 91 पेज के एफिडेविट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।चुनाव आयोग ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सहयोग करने के बजाय SIR प्रक्रिया में हर कदम पर बाधाएं खड़ी की हैं। एफिडेविट में कहा गया है कि उन्होंने जनता को आयोग के खिलाफ भड़काया है, जिससे चुनाव अधिकारियों के खिलाफ धमकियां और हिंसा का माहौल बना है।

आयोग ने ममता बनर्जी के 14 जनवरी को दिए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने भय फैलाया, SIR प्रक्रिया के बारे में भ्रामक जानकारी दी और चुनाव अधिकारियों को निशाना बनाया। इससे एक माइक्रो ऑब्जर्वर को सार्वजनिक रूप से अलग-थलग कर अनुचित दबाव डाला गया।

एफिडेविट में तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों पर भी भय का माहौल बनाने का आरोप है। उदाहरण के तौर पर एक मंत्री के बयान का हवाला दिया गया कि वे चुनाव आयोग की “टांगें तोड़ देंगे”, जबकि एक विधायक ने नाम हटाने को “आग से खेलना” बताया।एक प्रमुख घटना का जिक्र करते हुए आयोग ने उत्तर दिनाजपुर जिले के चाकुलिया में बीडीओ कार्यालय पर हमले का उल्लेख किया, जहां लगभग 700 उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की और आग लगाई। इसी तरह मुर्शिदाबाद के फरक्का में भी टीएमसी विधायक के नेतृत्व में हमला हुआ। चुनाव आयोग ने इन घटनाओं को ममता बनर्जी के उकसावे का नतीजा बताया है।

आयोग ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को अन्य राज्यों से “चिंताजनक” करार दिया है। जहां अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही, वहीं बंगाल में चुनाव अधिकारियों के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा, धमकियां और बाधाएं पैदा की जा रही हैं। कई BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) और माइक्रो ऑब्जर्वर ने हिंसा के कारण काम छोड़ दिया है।

एफिडेविट में राज्य सरकार पर FIR दर्ज करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई में जानबूझकर लापरवाही बरतने का भी आरोप है। आयोग ने इसे “परेशान करने वाला पैटर्न” बताया है।

यह एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़ी याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें BLOs की सुरक्षा की मांग की गई थी। यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी तनाव का हिस्सा है, जहां TMC इसे “वोटरों के नाम काटने की साजिश” बता रही है, जबकि चुनाव आयोग इसे निष्पक्ष और आवश्यक प्रक्रिया बता रहा है।

 

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