झारखंड में ED और राज्य पुलिस के बीच टकराव : रांची पुलिस की ED ऑफिस पर ‘छापेमारी’ के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची ED, CBI जांच की मांग

रांची, 15 जनवरी 2026

 

झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव अब झारखंड हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। ED ने रांची पुलिस द्वारा अपने कार्यालय पर की गई ‘छापेमारी’ या जांच के खिलाफ रिट याचिका दाखिल की है, जिसमें पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की गई है। ED का आरोप है कि राज्य पुलिस जानबूझकर जांच में बाधा डाल रही है और ED अधिकारियों को फर्जी मामलों में फंसाने की कोशिश कर रही है। यह घटना पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए ED और राज्य पुलिस के टकराव की याद दिलाती है, जहां I-PAC रेड मामले में भी इसी तरह का विवाद उभरा था।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह टकराव ED की विभिन्न घोटालों की जांच से जुड़ा है, जो झारखंड में सत्तारूढ़ JMM-कांग्रेस गठबंधन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े मामलों पर केंद्रित है। ED लंबे समय से भूमि घोटाला (land scam), मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध खनन (illegal mining), साहिबगंज टोल टेंडर घोटाला और अब पेयजल घोटाला (drinking water scam) की जांच कर रही है। राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पूछताछ के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया था, जिसे ED ने संसदीय अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए अस्वीकार कर दिया।

विवाद की शुरुआत 2023-2024 से मानी जा सकती है, जब ED ने हेमंत सोरेन को भूमि घोटाले में समन जारी किए। सोरेन ने ED अधिकारियों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई, जिसमें ED ने CBI जांच की मांग की। अप्रैल 2024 में ED ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ED अधिकारियों और पत्रकारों के खिलाफ दर्ज केस की CBI जांच मांगी। इसी दौरान, ED ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ED अधिकारियों को फर्जी मामलों में फंसा रही है ताकि जांच बाधित हो।

ताजा घटना: रांची पुलिस की ED ऑफिस पर ‘छापेमारी’

ताजा विवाद 15 जनवरी 2026 को शुरू हुआ, जब रांची पुलिस की एक टीम ED के एयरपोर्ट रोड स्थित कार्यालय पहुंची। पुलिस का दावा था कि पेयजल घोटाले के आरोपी संतोष कुमार ने ED अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान शारीरिक हमला करने और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया है। पुलिस टीम इन आरोपों की जांच करने और ED कर्मियों से पूछताछ करने आई थी। ED ऑफिस के बाहर सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्स (CSF) के जवान तैनात थे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। ED ने इसे ‘छापेमारी’ करार दिया और राज्य पुलिस पर जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाया।

ED का कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई जांच में बाधा डालने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की साजिश है। वहीं, विपक्षी नेता बाबूलाल मरांडी ने ED ऑफिस की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की मांग की है, उनका आरोप है कि JMM-कांग्रेस गठबंधन ED टीमों पर हमले या बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। मरांडी ने कहा कि ED के पास मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अधिकारियों से जुड़े हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार के सबूत हैं, जिन्हें नष्ट करने की कोशिश हो सकती है।

ED की हाईकोर्ट याचिका और CBI जांच की मांग

ED ने तुरंत झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की, जिसमें रांची पुलिस की कार्रवाई को अवैध बताते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग की गई है। याचिका में ED ने कहा कि राज्य पुलिस FIR और ‘जानबूझकर’ जांच का इस्तेमाल कर ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को बाधित कर रही है। ED ने ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को CBI को ट्रांसफर करने की भी अपील की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की तारीख तय करने का संकेत दिया है, लेकिन अभी कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई।

पिछले मामलों में भी ED ने इसी तरह CBI जांच की मांग की थी, जैसे मार्च 2025 में रांची पुलिस पर wrongful detention का आरोप लगाते हुए, जहां ED ने CBI जांच के लिए याचिका दाखिल की थी।

पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़ा है। ED की जांच में हेमंत सोरेन और उनके करीबियों पर भूमि घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं, जिसमें ED ने कई समन जारी किए। सोरेन की याचिका हाल ही में हाईकोर्ट ने खारिज कर दी, जिसमें ED समन की अनदेखी पर व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य की गई। राज्य सरकार का आरोप है कि ED राजनीतिक प्रतिशोध में लगी है, जबकि ED का कहना है कि जांच निष्पक्ष है और कानून सबके लिए बराबर।

यह मामला पश्चिम बंगाल के I-PAC रेड विवाद से मिलता-जुलता है, जहां ED ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली। सुप्रीम कोर्ट ने वहां ED को राहत दी थी। झारखंड का यह टकराव भी केंद्र-राज्य संघर्ष का नया अध्याय बन सकता है।

 

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