अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में भूकंप: 6.3 तीव्रता का झटका, 7 लोगों की मौत, 150 से अधिक घायल

मजार-ए-शरीफ (अफगानिस्तान), 3 नवंबर 2025

 

अफगानिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में सोमवार सुबह आए भूकंप ने एक बार फिर तबाही मचा दी। मजार-ए-शरीफ शहर के निकट 6.3 तीव्रता का भूकंप आने से कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रांतीय अधिकारियों ने दी है।

संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र मजार-ए-शरीफ के पास खुल्म शहर में 28 किलोमीटर की गहराई पर था। यह झटका स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 1 बजे आया, जिससे लोग घरों से बाहर भागे। राष्ट्रीय भूकंप केंद्र (NCS) ने भी 6.3 तीव्रता की पुष्टि की है। USGS ने अपने PAGER सिस्टम में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जो दर्शाता है कि इससे महत्वपूर्ण जानमाल की हानि और व्यापक क्षति संभव है।बाल्ख प्रांत के प्रवक्ता हाजी जायद के मुताबिक, भूकंप ने शहर के प्रसिद्ध ब्लू मस्जिद (मजार-ए-शरीफ) के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया है, जो हजरत अली (र.अ.) की मزار के रूप में जाना जाता है। समंगान प्रांत के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता समीम जॉयंदा ने बताया कि सुबह तक अस्पतालों में 150 घायलों को भर्ती किया गया है, जबकि 7 शव प्राप्त हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

मजार-ए-शरीफ, अफगानिस्तान के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक है, जहां करीब 5 लाख लोग रहते हैं। एक स्थानीय निवासी रहिमा ने सीएनएन को बताया, “हम सब डर से कांप उठे। बच्चे चीखते हुए सीढ़ियों से नीचे भागे। कभी इतना तेज झटका महसूस नहीं किया।” कई घरों की खिड़कियां टूट गईं और दीवारों का प्लास्टर गिर गया। भूकंप का असर ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तक महसूस किया गया।यह अफगानिस्तान में इस साल का तीसरा बड़ा भूकंप है। अगस्त में पूर्वी अफगानिस्तान में 6.0 तीव्रता के भूकंप से 2,200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला के पास भूकंप आम हैं, जहां यूरेशियन और इंडियन टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं।

तत्कालीन तालिबान प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है। अफगानिस्तान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल तैनात हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि देश पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और बार-बार आने वाले भूकंप संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।

 

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