अमड़ापाड़ा (पाकुड़), 12 मार्च 2026
झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड अंतर्गत पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक में पिछले कई दिनों से विस्थापित ग्रामीणों का धरना जारी है। 9 मार्च से शुरू हुए इस आंदोलन में ग्रामीणों ने कोयला खनन और परिवहन की सभी गतिविधियां पूरी तरह रोक दी हैं, जिससे कंपनी को प्रतिदिन लाखों-करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति (पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक-बिशनपुर) के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासी ग्रामीण—महिलाएं, पुरुष और बच्चे—सार प्रॉजेक्ट गेट के समक्ष डटे हुए हैं। उनका आरोप है कि वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBPDCL) और माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (MDO) बीजीआर कंपनी पिछले 7-8 वर्षों से यहां खनन कर रही है, लेकिन MoU/अनुबंध की शर्तों का आंशिक पालन भी नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों को केवल धूल, बीमारी और शोषण मिला है, जबकि कंपनी करोड़ों-अरबों का कारोबार कर रही है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- प्रभावित क्षेत्र में सुविधायुक्त स्पेशल/सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना और बहाली।
- बेहतर औपचारिक एवं तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था (स्कूल निर्माण सहित)।
- योग्यता के अनुरूप रोजगार और वेतन में उचित वृद्धि।
- कोयला निकाले गए जमीन का समतलीकरण (land leveling) तीन महीने के भीतर शुरू करने का लिखित आश्वासन।
- स्किल डेवलपमेंट और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं की गारंटी।
- मोबाइल मेडिकल यूनिट के बजाय स्थायी स्वास्थ्य सुविधा और गंभीर मरीजों के इलाज का कंपनी द्वारा पूरा खर्च।
ग्रामीण प्रतिनिधियों जैसे बानेश्वर टुडू, अन्द्रियास मूर्मू, शिवधन हेम्ब्रम, महतान टुडू, मालती हेम्ब्रम, मुंशी टुडू आदि ने कहा, “हम वर्षों से झूठे आश्वासनों और बैठकों में उलझाए जा रहे हैं। अब कोई ठोस निदान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज होगा—चक्का जाम जारी रहेगा।”
कंपनी और प्रशासन का पक्ष
WBPDCL के महाप्रबंधक रामाशीष चटर्जी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र कई बुनियादी सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। मोबाइल मेडिकल यूनिट चल रही है, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्लान हो रहा है। माइनिंग प्रभावित बच्चों को स्कॉलरशिप दी जा रही है, 376 प्रभावितों को अनस्किल्ड मजदूरी मिल रही है, स्किल डेवलपमेंट केंद्र विस्तारित हो रहे हैं। लैंड लेवलिंग माइनिंग क्लोजर प्लान के तहत होगा। फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करने पर 3.80 करोड़ खर्च हो रहा है, जहां जल्द BP, यूरिन टेस्ट, ECG, X-ray जैसी सुविधाएं शुरू होंगी और 31 मार्च तक एम्बुलेंस उपलब्ध होगी।हालांकि ग्रामीणों ने फतेहपुर अपग्रेड प्रस्ताव ठुकरा दिया और अलग से प्रभावित क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मांग पर अड़े हैं। त्रिपक्षीय बैठकों (प्रशासन, कंपनी, ग्रामीण) के बावजूद अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला।
