हिजला मेला में बैनर, पोस्टर व स्मारिका संताली भाषा की ओल चिकी लिपि में भी छापने की मांग

दुमका, 30 जनवरी 2026

 

विभिन्न सामाजिक संगठनों — पारसी आ़रीचा़ली मरांङ बुरू आखड़ा, दुमका; संताल एसोसिएशन फॉर अवेयरनेस एंड रिफॉर्म, दुमका; दिसोम मरांग बुरु युग जाहेर अखड़ा, दुमका; दिसोम मरांग बुरु संताली अरिचली आर लेगचार अखड़ा, दुमका; मरांग बुरु अखड़ा, दुमका; ऑल चिकी हुल बैसी, दुमका; सामाजिक जागरूकता युवा संगठन, मसलिया (दुमका); आदिवासी युवा संगठन (जामताड़ा); खैरवाड़ सांवता ऐभेन बा़ईसी, दुमका सहित अन्य संगठनों ने उपायुक्त सह मेला अध्यक्ष एवं अनुमंडल पदाधिकारी सह मेला सचिव, दुमका को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से संगठनों ने राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव–2026 में प्रयुक्त होने वाले बैनर, पोस्टर, स्मारिका, आमंत्रण पत्र, कृषि प्रदर्शनी एवं अन्य प्रचार सामग्री को संताली भाषा की ओल चिकी लिपि में भी प्रकाशित करने की मांग की।
संगठनों ने कहा कि झारखंड में आदिवासियों के नाम पर आयोजित एकमात्र राजकीय मेला हिजला मेला है, जिसमें संताल समुदाय की सांस्कृतिक, पारंपरिक एवं कृषि संबंधी विरासत को प्रदर्शित किया जाता है। चूँकि यह क्षेत्र संताल बहुल है, इसलिए यहां की मातृभाषा संताली एवं उसकी लिपि ओल चिकी में मेला संबंधी सामग्री प्रस्तुत किया जाना अधिक उपयुक्त, जनहितकारी एवं संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा।
ज्ञातव्य है कि संताली भाषा को 22 दिसंबर 2003 को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है तथा इसकी मान्यता प्राप्त लिपि ओल चिकी है। संगठनों का मानना है कि यदि मेला प्रचार-प्रसार संताली भाषा एवं ओल चिकी लिपि में किया जाता है, तो इससे आदिवासी भाषा, संस्कृति और लिपि के संरक्षण को बल मिलेगा तथा सरकार की योजनाएं और संदेश ग्रामीण स्तर तक अधिक प्रभावी रूप से पहुंच सकेंगे।
इस अवसर पर शिवनाथ बेसरा, गोविंद मुर्मू, जोसेफ मुर्मू, परेश मुर्मू, राजेन्द्र मुर्मू, सुभाष किस्कू, सोनेलाल मुर्मू, कमिश्नर मुर्मू, सोनाधन बेसरा, रशीलाल मुर्मू, मुन्ना हांसदा, सुफल मुर्मू, प्रदीप मुर्मू, दास सोरेन, अर्जुन मुर्मू, रोहित मुर्मू, अनुप हांसदा, आदित्य हांसदा, अर्जुन मरांडी, परिमल मुर्मू, अमोद बास्की, विकास टुडू सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

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